1. बस्तियाँ (Settlements)
बस्तियाँ वे स्थान हैं जहाँ लोग अपने लिए घर बनाते हैं। प्रारंभिक मनुष्य वृक्षों और गुफाओं में रहते थे, लेकिन कृषि के आगमन के साथ स्थायी आवास की आवश्यकता महसूस हुई।
बस्तियों का विकास
सभ्यता का विकास नदी घाटियों के निकट हुआ क्योंकि वहाँ जल की उपलब्धता और उपजाऊ मृदा थी।
सिंधु, टिग्रिस, नील और वांग-ही नदियों के किनारे मानवीय सभ्यताएँ विकसित हुईं।
बस्तियों के प्रकार
बस्तियाँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
1. अस्थायी बस्तियाँ:
ये बस्तियाँ कुछ समय के लिए ही बसाई जाती हैं।
घने जंगलों, गर्म एवं ठंडे रेगिस्तानों तथा पर्वतों के निवासी अक्सर ऐसी बस्तियों में रहते हैं।
मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ के लोग आखेट (शिकार), संग्रहण, स्थानांतरी कृषि और ऋतुप्रवास करते हैं।
2. स्थायी बस्तियाँ:
यहाँ लोग सदैव रहने के लिए घर बनाते हैं।
आधुनिक समय में अधिकांश बस्तियाँ स्थायी ही हैं।
ग्रामीण एवं शहरी बस्तियाँ
ग्रामीण बस्तियाँ (गाँव):
यहाँ के लोग कृषि, मत्स्य पालन, वानिकी, दस्तकारी और पशुपालन संबंधी कार्य करते हैं।
सघन बस्तियाँ: यहाँ घर पास-पास बने होते हैं। यह मैदानी क्षेत्रों में अधिक पाई जाती हैं।
प्रकीर्ण बस्तियाँ: यहाँ घर दूर-दूर स्थित होते हैं। यह पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों और अति विषम जलवायु वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
शहरी बस्तियाँ (नगर/शहर):
ये बस्तियाँ घनी और बड़ी होती हैं।
कार्य: यहाँ के लोग निर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं।
पर्यावरण और आवास निर्माण
आवास का निर्माण वहां की जलवायु और भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है:
भारी वर्षा वाले क्षेत्र: यहाँ छतों को ढालू बनाया जाता है ताकि पानी आसानी से बह सके।
जल जमाव वाले क्षेत्र: जहाँ पानी जमा होता है, वहां ऊँचे प्लेटफॉर्म या स्टिल्ट पर घर बनाए जाते हैं (जैसे असम में)।
गर्म जलवायु (मरुस्थल): यहाँ मिट्टी की मोटी दीवारों वाले घर पाए जाते हैं जिनकी छतें फूस (घास-फूस) की बनी होती हैं। यह गर्मी को अंदर आने से रोकती हैं (जैसे राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र)।
महत्वपूर्ण शब्दावली: ऋतुप्रवास (Transhumance)
लोगों के मौसमी आवागमन को ऋतुप्रवास कहते हैं। जो लोग पशु पालते हैं, वे मौसम में परिवर्तन के अनुसार नए चरागाहों की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। जैसे - गर्मियों में पहाड़ों पर और सर्दियों में घाटियों में जाना।
2. परिवहन (Transport)
परिवहन लोगों और सामान के आवागमन का साधन है। पुराने समय में अधिक दूरी तय करने में महीनों लग जाते थे, लेकिन आज आधुनिक साधनों ने इसे घंटों में समेट दिया है।
परिवहन के चार मुख्य साधन हैं:
सड़क मार्ग
रेल मार्ग
जल मार्ग
वायु मार्ग
क. सड़क मार्ग
कम दूरी के यातायात के लिए यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला साधन है।
सड़कों के प्रकार:
पक्की सड़कें: सीमेंट, कंक्रीट और कोलतार से बनी होती हैं। ये बारहमासी होती हैं।
कच्ची सड़कें: मिट्टी से बनी होती हैं। वर्षा ऋतु में ये अक्सर उपयोग के योग्य नहीं रहतीं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
मनाली-लेह राजमार्ग: हिमालय पर्वतमाला में स्थित यह सड़क विश्व के सबसे ऊँचे सड़क मार्गों में से एक है।
स्वर्ण चतुर्भुज महामार्ग: यह भारत के चार महानगरों - दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ता है।
मैदानी क्षेत्र: यहाँ सड़कों का घना जाल बिछा हुआ है।
दुर्गम क्षेत्र: मरुस्थलों, वनों और ऊँचे पर्वतों पर भी सड़कें बनी हैं। भूमिगत सड़कों को 'सब-वे' या भूमिगत मार्ग कहते हैं।
ख. रेल मार्ग
रेल मार्ग के द्वारा तीव्रता से और कम खर्च में लोगों का आवागमन और भारी सामान को ढोना संभव होता है।
विकास और तकनीक:
भाप के इंजन की खोज और औद्योगिक क्रांति ने रेल परिवहन के विकास में सहायता प्रदान की।
आज डीजल और विद्युत इंजनों ने भाप के इंजनों का स्थान ले लिया है।
सुपरफास्ट ट्रेनें: इनकी वजह से यात्रा की गति और तेज हो गई है (जैसे भारत में वंदे भारत, बुलेट ट्रेन परियोजना)।
भौगोलिक वितरण:
मैदानी इलाकों में रेल मार्गों का जाल व्यापक रूप से फैला है।
उन्नत प्रौद्योगिकी के कारण दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी रेलवे लाइनें बिछाई जा रही हैं (जैसे कोंकण रेलवे), लेकिन इनकी संख्या कम है।
भारतीय रेल नेटवर्क: यह एशिया में सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है।
CTET विशेष तथ्य:
ट्रांस-साइबेरियन रेलवे: यह विश्व का सबसे लंबा रेल मार्ग है। यह पश्चिमी रूस में सेंट पीटर्सबर्ग से प्रशांत महासागर के किनारे स्थित व्लादिवोस्तोक तक जाता है।
ग. जल मार्ग
अधिक दूरी में भारी और बड़े आकार वाले सामानों को ढोने के लिए जल मार्ग सबसे सस्ता साधन है।
यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. अंतर्देशीय जल मार्ग (Inland Waterways):
यह नदियों और झीलों का उपयोग करता है जो नाव चलाने योग्य होती हैं।
प्रमुख मार्ग:
गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (भारत)
उत्तरी अमेरिका में ग्रेट लेक्स
अफ्रीका में नील नदी
2. समुद्री मार्ग (Sea Routes):
इनका उपयोग मुख्य रूप से व्यापारिक माल और सामान को एक देश से दूसरे देश भेजने के लिए किया जाता है।
ये मार्ग पत्तनों (Ports) से जुड़े होते हैं।
विश्व के प्रमुख पत्तन:
एशिया: सिंगापुर, मुंबई
उत्तरी अमेरिका: न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स
दक्षिण अमेरिका: रियो डी जेनेरियो
अफ्रीका: डरबन, केप टाउन
ऑस्ट्रेलिया: सिडनी
यूरोप: लंदन, रॉटरडैम
घ. वायु मार्ग
यह परिवहन का सबसे तीव्र साधन है, जिसका विकास बीसवीं सदी के आरंभ में हुआ।
विशेषताएँ:
महंगा साधन: ईंधन की उच्च लागत के कारण यह सबसे महंगा साधन है।
बाधाएँ: खराब मौसम (कोहरा, तूफान) से यह प्रभावित होता है।
महत्व: यह यातायात का अकेला साधन है जो सर्वाधिक दुर्गम और दूरस्थ स्थानों तक पहुँच सकता है।
आपात्कालीन स्थिति: बाढ़, भूकंप या अन्य आपदाओं के समय लोगों को बचाने, भोजन, जल, कपड़े और दवाइयाँ बांटने के लिए हेलीकॉप्टर अत्यंत उपयोगी होता है।
3. संचार (Communication)
संचार दूसरों तक संदेश पहुँचाने की प्रक्रिया है। तकनीकी विकास के साथ मानव ने संचार के नए और तीव्र साधनों को विकसित कर लिया है।
संचार का विकास क्रम
प्रारंभिक काल: कबूतरों या संदेशवाहकों द्वारा संदेश भेजना।
डाक प्रणाली: चिट्ठी और पार्सल।
प्रिंट मीडिया: समाचार पत्र और पत्रिकाएँ।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया: रेडियो और टेलीविजन।
डिजिटल क्रांति: इंटरनेट, ईमेल, और सोशल मीडिया।
जनसंपर्क माध्यम (Mass Media)
समाचार पत्रों, रेडियो और टेलीविजन के द्वारा हम बड़ी संख्या में लोगों के साथ संचार कर सकते हैं, इसलिए इन्हें जनसंपर्क माध्यम कहते हैं।
उपग्रह (Satellites) की भूमिका
सेटेलाइट ने संचार को और तीव्र कर दिया है। केवल संचार ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी इनका उपयोग होता है:
तेल की खोज
वनों का सर्वेक्षण
भूमिगत जल की जानकारी
खनिज संपदा की खोज
मौसम का पूर्वानुमान
आपदा चेतावनी
इंटरनेट (Internet)
आज हम इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक मेल या ईमेल भेज सकते हैं।
वैश्विक समाज: इंटरनेट ने न केवल सूचना उपलब्ध कराई है बल्कि हमारे जीवन को सुखमय बनाया है। अब हम घर बैठे रेल, हवाई जहाज, सिनेमा या होटल के टिकट आरक्षित करवा सकते हैं।
4. CTET परीक्षा उपयोगी अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral): इसकी कुल लंबाई लगभग $5,846 \text{ km}$ है।
राष्ट्रीय राजमार्ग (NH): भारत में सड़कों का वर्गीकरण राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कों में किया जाता है।
बंदरगाह (Ports):
कांडला: यह एक ज्वारीय (Tidal) बंदरगाह है (गुजरात)।
कोलकाता: यह एक नदीय (Riverine) बंदरगाह है।
कोंकण रेलवे: यह पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से होकर गुजरता है और इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है।
इग्लू (Igloo): बर्फ के घर जो टुंड्रा प्रदेश (एस्किमो) में पाए जाते हैं। यह भी आवास का एक प्रकार है।
झूम खेती और बस्तियाँ: उत्तर-पूर्वी भारत में जहाँ झूम खेती (स्थानांतरी कृषि) होती है, वहाँ अक्सर अस्थायी बस्तियाँ पाई जाती हैं, हालाँकि अब यह प्रवृत्ति बदल रही है।
5. सारांश (Quick Recap Table)
मानवीय पर्यावरण: बस्तियाँ, परिवहन, संचार
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes