1. परिचय और शब्दावली
कृषि एक प्राथमिक क्रिया है। विश्व में लगभग $50\%$ लोग कृषि से संबंधित क्रियाओं में संलग्न हैं। भारत में दो-तिहाई जनसंख्या अब भी कृषि पर निर्भर है।
शब्द की उत्पत्ति:
एग्रीकल्कर (Agriculture) शब्द लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है:
Ager (एगर) या Agri (एग्री): जिसका अर्थ है मृदा (Soil)।
Culture (कल्चर): जिसका अर्थ है खेती या जुताई।
आर्थिक क्रियाओं के प्रकार:
पौधे से परिष्कृत उत्पाद तक के रूपांतरण में तीन प्रकार की आर्थिक क्रियाएं शामिल होती हैं:
प्राथमिक क्रियाएं: इनका संबंध प्राकृतिक संसाधनों के उत्पादन और निष्कर्षण से है।
उदाहरण: कृषि, मत्स्य पालन और संग्रहण।
द्वितीयक क्रियाएं: इनका संबंध इन संसाधनों के प्रसंस्करण (Processing) से है।
उदाहरण: इस्पात निर्माण, डबलरोटी पकाना और कपड़ा बुनना।
तृतीयक क्रियाएं: ये सेवा क्षेत्र हैं जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र को सहयोग प्रदान करती हैं।
उदाहरण: यातायात, व्यापार, बैंकिंग, बीमा और विज्ञापन।
2. कृषि के विभिन्न प्रकार (कल्चर शब्दावली)
CTET परीक्षाओं में अक्सर विभिन्न प्रकार की 'कल्चर' का मिलान पूछा जाता है:
एग्रीकल्कर (Agriculture): मृदा की जुताई, फसलों का उगाना और पशुपालन। इसे खेती भी कहते हैं।
सेरीकल्चर (Sericulture): रेशम उत्पादन। रेशम के कीड़ों का वाणिज्यिक पालन।
पिसीकल्चर (Pisciculture): मत्स्य पालन। विशेष रूप से निर्मित तालाबों और पोखरों में मछली पालन।
विटीकल्चर (Viticulture): द्राक्षाकृषि। अंगूरों की खेती।
हॉर्टिकल्चर (Horticulture): उद्यान कृषि। वाणिज्यिक उपयोग के लिए सब्जियां, फूल और फल उगाना।
3. कृषि तंत्र (Farm System)
कृषि को एक तंत्र के रूप में देखा जा सकता है। इसके तीन महत्वपूर्ण भाग हैं:
निवेश (Inputs):
मशीनरी
बीज
उर्वरक
श्रमिक
भौतिक निवेश: सूर्य का प्रकाश, वर्षा, तापमान, मृदा, ढाल।
प्रक्रम (Process):
जुताई
बुआई
छिड़काव
सिंचाई
कटाई
निर्गत (Outputs):
अनाज (फसल)
ऊन
डेयरी उत्पाद
कुक्कुट उत्पाद
4. कृषि के प्रकार (Types of Farming)
भौगोलिक दशाओं, उत्पाद की मांग, श्रम और तकनीक के स्तर के आधार पर कृषि को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
(A) निर्वाह कृषि (Subsistence Farming)
इस प्रकार की खेती कृषक परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की जाती है। इसमें पारंपरिक तकनीक और निम्न स्तरीय औजारों का प्रयोग होता है।
1. गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture):
क्षेत्र: दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और पूर्व एशिया के सघन जनसंख्या वाले मानसूनी प्रदेश।
विशेषता: किसान छोटे भूखंड पर साधारण औजारों और अधिक श्रम से खेती करता है।
जलवायु: धूप वाले दिनों की अधिकता और उर्वर मृदा से एक वर्ष में एक से अधिक फसलें उगाई जाती हैं।
मुख्य फसल: चावल (प्रमुख फसल), गेहूँ, मक्का, दलहन और तिलहन।
2. आदिम निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture):
इसके अंतर्गत 'स्थानांतरी कृषि' और 'चलवासी पशुचारण' शामिल हैं।
क. स्थानांतरी कृषि (Shifting Cultivation):
अन्य नाम: कर्तन एवं दहन कृषि (Slash and Burn).
प्रक्रिया: वृक्षों को काटकर और जलाकर भूखंड साफ किया जाता है। राख को मृदा में मिलाया जाता है। जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान उस भूमि को छोड़ देता है और नई भूमि पर चला जाता है।
क्षेत्र: भारी वर्षा वाले और वनस्पति के तीव्र पुनर्जनन वाले क्षेत्र (अमेज़न बेसिन, उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वोत्तर भारत)।
मुख्य फसलें: मक्का, रतालू, आलू, कसावा।
स्थानांतरी कृषि के विभिन्न नाम (अत्यंत महत्वपूर्ण):
झूमिंग: उत्तर-पूर्वी भारत (असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड)।
पालामू: मणिपुर।
दीपा: छत्तीसगढ़ (बस्तर) और अंडमान- निकोबार।
बेवर/दहिया: मध्य प्रदेश।
पोडु/पेंडा: आंध्र प्रदेश।
कुरुवा: झारखंड।
मिल्पा: मैक्सिको और मध्य अमेरिका।
रोका: ब्राजील।
लदांग: मलेशिया और इंडोनेशिया।
रे: वियतनाम।
ख. चलवासी पशुचारण (Nomadic Herding):
प्रक्रिया: पशुचारक अपने पशुओं के साथ चारे और पानी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर निश्चित मार्गों से घूमते हैं।
क्षेत्र: सहारा के शुष्क प्रदेश, मध्य एशिया, भारत के कुछ भाग (राजस्थान, जम्मू और कश्मीर)।
पशु: भेड़, ऊंट, मवेशी, याक और बकरियां।
उद्देश्य: दूध, मांस, ऊन, खाल और अन्य उत्पाद।
(B) वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming)
इसमें फसल उत्पादन और पशुपालन बाजार में विक्रय हेतु किया जाता है। इसमें विस्तृत कृषि क्षेत्र और अधिक पूंजी का उपयोग होता है। कार्य मशीनों द्वारा किया जाता है।
1. वाणिज्यिक अनाज कृषि:
उद्देश्य: केवल अनाज उगाना।
मुख्य फसलें: गेहूँ और मक्का।
क्षेत्र: उत्तर अमेरिका, यूरोप और एशिया के शीतोष्ण घास के मैदान।
विशेषता: सैकड़ों हेक्टेयर के बड़े फार्म। अत्यधिक ठंड के कारण वर्धन काल छोटा होता है और केवल एक फसल उगाई जा सकती है।
2. मिश्रित कृषि (Mixed Farming):
परिभाषा: जब भूमि का उपयोग भोजन व चारे की फसलें उगाने और पशुपालन के लिए किया जाता है।
क्षेत्र: यूरोप, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका।
3. रोपण कृषि (Plantation Agriculture):
प्रकार: यह भी वाणिज्यिक कृषि का एक प्रकार है।
विशेषता: बड़े पैमाने पर श्रम और पूंजी की आवश्यकता। उत्पाद का प्रसंस्करण खेतों पर ही या निकट की फैक्ट्रियों में होता है। परिवहन जाल का विकास अनिवार्य है।
मुख्य फसलें: चाय, कहवा (कॉफी), काजू, रबड़, केला, कपास।
क्षेत्र: उष्णकटिबंधीय प्रदेश।
रबड़: मलेशिया।
कहवा: ब्राजील।
चाय: भारत और श्रीलंका।
5. मुख्य फसलें (Major Crops)
बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विविध प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
(A) खाद्य फसलें (Food Crops)
1. चावल (Rice):
महत्व: विश्व की मुख्य खाद्य फसल। उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय प्रदेशों का मुख्य आहार।
जलवायु: उच्च तापमान, उच्च आर्द्रता और अधिक वर्षा की आवश्यकता।
मृदा: चीका युक्त जलोढ़ मृदा (जिसमें जल रोकने की क्षमता हो) सर्वोत्तम है।
उत्पादक: चीन (अग्रणी), भारत, जापान, श्रीलंका, मिस्र।
2. गेहूँ (Wheat):
जलवायु: वर्धन काल (बढ़ते समय) में मध्यम तापमान व वर्षा और कटाई (सस्य कर्तन) के समय तेज़ धूप की आवश्यकता।
मृदा: सु-अपवाहित दुमट मृदा (Loamy soil)।
उत्पादक: संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, अर्जेंटीना, रूस, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और भारत।
भारत में स्थिति: यह शीत ऋतु (रबी) में उगाया जाता है।
3. मिलेट/मोटा अनाज (Millets):
विशेषता: ये कम उपजाऊ और बलुआ मृदा में उगाई जा सकती हैं। इसे शुष्क प्रदेशों की फसल माना जाता है।
जलवायु: कम वर्षा और उच्च से मध्यम तापमान तथा पर्याप्त सूर्य प्रकाश की आवश्यकता।
फसलें: ज्वार, बाजरा और रागी।
उत्पादक: भारत, नाइजीरिया, चीन और नाइजर।
4. मक्का (Maize):
अन्य नाम: कॉर्न (Corn)।
जलवायु: मध्यम तापमान, वर्षा और अधिक धूप की आवश्यकता।
मृदा: सु-अपवाहित उपजाऊ मृदा।
उत्पादक: उत्तर अमेरिका (प्रमुख), ब्राजील, चीन, रूस, कनाडा, भारत और मैक्सिको।
(B) रेशेदार फसलें (Fibre Crops)
1. कपास (Cotton):
कच्चा माल: सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रमुख कच्चा माल।
जलवायु: उच्च तापमान, हल्की वर्षा।
विशेष आवश्यकता: $210$ पाला-रहित दिन (Frost-free days) और खिली हुई धूप।
मृदा: काली और जलोढ़ मृदा सर्वोत्तम है।
उत्पादक: चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, पाकिस्तान, ब्राजील और मिस्र।
2. पटसन (Jute):
उपनाम: सुनहरा रेशा (Golden Fibre)।
मृदा: जलोढ़ मृदा।
जलवायु: उच्च तापमान, भारी वर्षा और आर्द्र जलवायु। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है।
उत्पादक: भारत और बांग्लादेश अग्रणी उत्पादक हैं।
(C) पेय फसलें (Beverage Crops)
1. कॉफी (Coffee):
जलवायु: गर्म एवं आर्द्र जलवायु।
मृदा: सु-अपवाहित दोमट मृदा।
स्थान: इस फसल की वृद्धि के लिए पर्वतीय ढाल अधिक उपयुक्त होती है।
उत्पादक: ब्राजील (विश्व में अग्रणी), कोलंबिया और भारत।
2. चाय (Tea):
महत्व: बागानों में उगाई जाने वाली एक पेय फसल।
जलवायु: ठंडी जलवायु और वर्ष भर समवितरित उच्च वर्षा (पत्तियों के विकास के लिए)।
मृदा: सु-अपवाहित दोमट मृदा और मंद ढाल।
श्रम: पत्तियों को चुनने के लिए अधिक संख्या में सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
उत्पादक: केन्या, भारत, चीन, श्रीलंका।
6. भारत में कृषि ऋतुएँ (Agricultural Seasons in India)
भारत में तीन मुख्य सस्य ऋतुएँ हैं:
| ऋतु | बुआई का समय | कटाई का समय | मुख्य फसलें |
| रबी (Rabi) | शीत ऋतु (अक्टूबर-दिसंबर) | ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल-जून) | गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों |
| खरीफ (Kharif) | मानसून का आगमन (जून-जुलाई) | शीत ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) | चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली, सोयाबीन |
| ज़ायद (Zaid) | रबी और खरीफ के बीच (ग्रीष्मकाल) | अप्रैल-जून | तरबूज, खरबूजा, खीरा, सब्जियां, चारे की फसलें |
7. कृषि विकास (Agricultural Development)
कृषि विकास का संबंध बढ़ती जनसंख्या की मांग को पूरा करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में किए गए प्रयासों से है।
तरीके:
बोए गए क्षेत्र में विस्तार करना।
बोई जाने वाली फसलों की संख्या बढ़ाना।
सिंचाई सुविधाओं में सुधार।
उर्वरकों और उच्च उपज देने वाले बीजों का प्रयोग।
कृषि का मशीनीकरण।
अंतिम लक्ष्य: खाद्य सुरक्षा (Food Security) को सुनिश्चित करना।
खाद्य सुरक्षा: जब सभी लोगों को हर समय अपनी सक्रिय और स्वस्थ जीवन शैली के लिए आहार की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक भौतिक और आर्थिक पहुँच हो।
8. केस स्टडी: भारत बनाम संयुक्त राज्य अमेरिका का एक फार्म
NCERT में तुलनात्मक अध्ययन दिया गया है जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
1. भारत का एक फार्म:
आकार: छोटा (लगभग $1.5$ हेक्टेयर)।
आवास: किसान मुख्य गाँव में रहता है।
तकनीक: किसान उच्च उपज देने वाले बीजों (HYV) का प्रयोग करता है। जुताई के लिए भाड़े पर ट्रैक्टर लेता है या बैलों का प्रयोग करता है। सिंचाई के लिए नलकूप (Tube well) का प्रयोग करता है।
परामर्श: सरकारी कृषि अधिकारियों या मित्रों से सलाह लेता है।
बिक्री: उपज को निकट की मंडी में बेचता है। भंडारण की सुविधाओं की कमी होती है, जिससे उसे ओने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ती है।
2. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का एक फार्म:
आकार: बहुत बड़ा (औसतन $250$ हेक्टेयर)।
आवास: किसान प्रायः फार्म में ही रहता है।
तकनीक: मक्का, सोयाबीन, गेहूँ, चुकंदर उगाई जाती हैं। मृदा के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है (वैज्ञानिक उर्वरक कार्यक्रम)।
मशीनीकरण: ट्रैक्टर, बीज बोने की मशीनें (Seed Drills), समतलक (Leveler), संयुक्त हार्वेस्टर और थ्रेशर का उपयोग होता है।
बिक्री: अनाज स्वचालित अन्न भंडार (Silo) में संचित किए जाते हैं या बाजार अभिकरणों (Market Agencies) में भेजे जाते हैं। किसान एक व्यवसायी की तरह काम करता है, न कि खेतिहर किसान की तरह।
9. भारत में कृषि क्रांतियाँ (Agricultural Revolutions)
हरित क्रांति (Green Revolution): खाद्यान्न उत्पादन (विशेषकर गेहूँ और चावल)। एम.एस. स्वामीनाथन (भारत), नॉर्मन बोरलॉग (विश्व)।
श्वेत क्रांति (White Revolution): दुग्ध उत्पादन। इसे 'ऑपरेशन फ्लड' भी कहते हैं। वर्गीज कुरियन।
नीली क्रांति (Blue Revolution): मत्स्य उत्पादन।
पीली क्रांति (Yellow Revolution): तिलहन उत्पादन।
गोल क्रांति (Round Revolution): आलू उत्पादन।
स्वर्ण क्रांति (Golden Revolution): बागवानी/शहद।
10. भूदान-ग्रामदान आंदोलन
प्रवर्तक: विनोबा भावे।
इसे 'रक्तहीन क्रांति' भी कहा जाता है।
विनोबा भावे ने गांधीजी के 'ग्राम स्वराज' की अवधारणा को फैलाने के लिए पदयात्रा की।
पोचमपल्ली (आंध्र प्रदेश/तेलंगाना) में कुछ भूमिहीन ग्रामीणों की मांग पर श्री रामचंद्र रेड्डी ने $80$ एकड़ भूमि $80$ भूमिहीन ग्रामीणों को दान दी। इसे भूदान कहा गया।
बाद में कुछ जमींदारों ने पूरे गाँव दान दिए, जिसे ग्रामदान कहा गया।
11. महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Points)
जैविक कृषि (Organic Farming): इस प्रकार की कृषि में रासायनिक खादों के स्थान पर जैविक खाद और प्राकृतिक पीड़कनाशी का उपयोग किया जाता है। आनुवंशिक रूपांतरण (Genetic Modification) का उपयोग नहीं किया जाता है।
सहकारी कृषि: जब किसानों का एक समूह अपनी संसाधनों को मिलाकर खेती करता है। डेनमार्क में यह बहुत सफल रहा।
सामूहिक कृषि: इसे पूर्व सोवियत संघ में 'कोलखोज' (Kolkhoz) कहा जाता था।
भारत की मुख्य समस्याएँ: जोत का छोटा आकार, मानसून पर निर्भरता, निम्न उत्पादकता, और वित्तीय बाधाएँ।
रोपण कृषि और वाणिज्यिक कृषि में अंतर: रोपण कृषि में एक ही फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, जबकि वाणिज्यिक अनाज कृषि में अनाज प्रमुख होता है और मिश्रित कृषि में पशुपालन साथ होता है।
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