कब, कहाँ और कैसे?

Sunil Sagare
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1. इतिहास क्या है और इसे क्यों पढ़ें?

इतिहास केवल राजाओं और रानियों की कहानियाँ नहीं है, बल्कि यह सामान्य लोगों, उनकी जीवन शैली, भोजन, कपड़े, बस्तियों और वैज्ञानिक प्रगति का अध्ययन है।

  • अतीत का अध्ययन: हम अतीत के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं—जैसे लोग क्या खाते थे, कैसे कपड़े पहनते थे, और किस तरह के घरों में रहते थे।

  • जीवनशैलियों की विविधता: हम शिकारियों (आखेटकों), पशुपालकों, कृषकों, शासकों, व्यापारियों, पुरोहितों, शिल्पकारों, कलाकारों और वैज्ञानिकों के जीवन के बारे में जानकारियाँ हासिल करते हैं।

  • बच्चों का अतीत: इतिहास यह भी बताता है कि पुराने समय में बच्चे कौन से खेल खेलते थे, कौन सी कहानियाँ सुनते थे और कौन से गीत गाते थे।

  • परिवर्तन का अध्ययन: यह हमें यह समझने में मदद करता है कि वर्तमान दुनिया कैसे विकसित हुई है।


2. लोग कहाँ रहते थे? (भौगोलिक रूपरेखा)

भारतीय उपमहाद्वीप में मानव बसाव के कई चरण हैं। भूगोल ने भारतीय इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नर्मदा घाटी (Narmada Valley)

  • लाखों वर्ष पूर्व: यहाँ लोग कई लाख वर्षों से रह रहे हैं।

  • जीवन शैली: यहाँ के आरंभिक लोग कुशल संग्राहक थे। वे आस-पास के जंगलों की विशाल संपदा से परिचित थे।

  • भोजन: वे अपने भोजन के लिए जड़ें, फलों और जंगल के अन्य उत्पादों का संग्रह करते थे। वे जानवरों का आखेट (शिकार) भी करते थे।

  • महत्व: यह क्षेत्र शिकार और खाद्य-संग्रहण (Hunting-Gathering) के सबसे पुराने स्थलों में से एक है।

सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ (उत्तर-पश्चिम)

  • स्थान: यह वर्तमान पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर स्थित है।

  • कृषि का आरंभ: इसी क्षेत्र में कुछ ऐसे स्थान हैं जहाँ लगभग $8000$ वर्ष पूर्व स्त्री-पुरुषों ने सबसे पहले गेहूँ और जौ जैसी फसलों को उपजाना आरंभ किया।

  • पशुपालन: उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया।

  • बसाव: यहाँ के लोग गाँवों में रहते थे, जो स्थायी जीवन का प्रमाण है।

गारो पहाड़ियाँ (उत्तर-पूर्व) और मध्य भारत में विंध्य पहाड़ियाँ

  • कृषि का विकास: ये वे अन्य क्षेत्र थे जहाँ कृषि का विकास हुआ।

  • चावल की खेती: जहाँ सबसे पहले चावल उपजाया गया, वे स्थान विंध्य के उत्तर में स्थित थे।

  • महत्व: गारो पहाड़ियाँ पूर्वोत्तर भारत में कृषि के साक्ष्य प्रदान करती हैं, जबकि विंध्य क्षेत्र मध्य भारत में कृषि विकास को दर्शाता है।

सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ

  • सहायक नदी: सहायक नदियाँ उन्हें कहते हैं जो एक बड़ी नदी में मिल जाती हैं (जैसे सतलुज, रावी, ब्यास, चिनाब, झेलम)।

  • प्रथम नगर: लगभग $4700$ वर्ष पूर्व इन्हीं नदियों के किनारे कुछ आरंभिक नगर फले-फूले। इसे हड़प्पा सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है।

  • शहरीकरण: यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्रथम नगरीकरण का उदाहरण है।

गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (सोन नदी)

  • बाद के नगर: गंगा व उसकी सहायक नदियों के किनारे तथा समुद्र तटवर्ती इलाकों में नगरों का विकास लगभग $2500$ वर्ष पूर्व हुआ।

  • मगध साम्राज्य: गंगा के दक्षिण में इन नदियों के आस-पास का क्षेत्र प्राचीन काल में मगध नाम से जाना जाता था।

  • शासक: इसके शासक बहुत शक्तिशाली थे और उन्होंने एक विशाल राज्य स्थापित किया। मगध भारत का पहला बड़ा साम्राज्य बना।


3. देश के नाम: 'इंडिया' और 'भारत'

हमारे देश के नामों के पीछे एक रोचक भाषाई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है।

इंडिया (India)

  • यह शब्द Indus से निकला है।

  • संस्कृत में इसे सिंधु कहा जाता है।

  • लगभग $2500$ वर्ष पूर्व उत्तर-पश्चिम की ओर से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस (Hindos) अथवा इंडोस (Indos) कहा।

  • इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि प्रदेश को 'इंडिया' कहा गया।

भारत (Bharat)

  • 'भरत' नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था।

  • स्रोत: इस समूह का उल्लेख संस्कृत की आरंभिक कृति ऋग्वेद (लगभग $3500$ वर्ष पुरानी) में मिलता है।

  • बाद में इसका प्रयोग पूरे देश के लिए होने लगा।


4. अतीत के बारे में कैसे जानें? (ऐतिहासिक स्रोत)

इतिहासकार जासूस की तरह होते हैं जो विभिन्न सुरागों (स्रोतों) का उपयोग करके अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं। मुख्य रूप से दो प्रकार के स्रोत होते हैं: पुरातात्विक और साहित्यिक।

A. पांडुलिपि (Manuscript)

  • परिभाषा: अतीत में हाथ से लिखी गई पुस्तकें पांडुलिपि कहलाती हैं।

  • उत्पत्ति: अंग्रेजी शब्द 'Manuscript' लैटिन शब्द 'Menu' (जिसका अर्थ है हाथ) से बना है।

  • सामग्री: ये पांडुलिपियाँ प्रायः ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले भुर्ज नामक पेड़ की छाल से विशेष तरीके से तैयार 'भोजपत्र' पर लिखी मिलती हैं।

  • नष्ट होने का कारण: नाजुक होने के कारण कई पांडुलिपियाँ कीड़ों द्वारा खा ली गईं या नष्ट कर दी गईं।

  • उपलब्धता: फिर भी, कई पांडुलिपियाँ आज भी मंदिरों और विहारों में सुरक्षित हैं।

  • विषय: इन पुस्तकों में धार्मिक मान्यताओं, राजाओं के जीवन, औषधियों और विज्ञान जैसे सभी प्रकार के विषयों की चर्चा मिलती है।

  • भाषा: ये संस्कृत, प्राकृत (आम लोगों की भाषा) और तमिल में लिखी मिलती हैं।

B. अभिलेख (Inscriptions)

  • परिभाषा: ऐसे लेख जो पत्थर अथवा धातु जैसी अपेक्षाकृत कठोर सतहों पर उत्कीर्ण (खोदे) किए जाते हैं।

  • उपयोग:

    • शासक अपने आदेशों को इस तरह उत्कीर्ण करवाते थे ताकि लोग उन्हें देख सकें, पढ़ सकें और उनका पालन कर सकें।

    • राजाओं और रानियों के कार्यों का विवरण।

    • विजयों का लेखा-जोखा (जैसे अशोक के अभिलेख या समुद्रगुप्त की प्रशस्ति)।

  • लाभ: ये पांडुलिपियों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और आसानी से नष्ट नहीं होते।

  • कांधार अभिलेख: अफगानिस्तान के कांधार से प्राप्त अशोक का अभिलेख यूनानी और अरामाइक नामक दो भिन्न लिपियों तथा भाषाओं में है।

C. पुरातत्व (Archaeology)

  • पुरातत्वविद: वह व्यक्ति जो अतीत में बनी और प्रयोग में लाई गई वस्तुओं का अध्ययन करता है।

  • अध्ययन सामग्री:

    • पत्थर और ईंट से बनी इमारतों के अवशेष।

    • चित्र और मूर्तियाँ।

    • औजार, हथियार, बर्तन, आभूषण और सिक्के।

  • उत्खनन: पुरातत्वविद धरती के अंदर दबी वस्तुओं को खोजने के लिए खुदाई (उत्खनन) करते हैं।

  • जैविक अवशेष: वे जानवरों, चिड़ियों और मछलियों की हड्डियाँ भी ढूँढ़ते हैं। इससे यह जानने में मदद मिलती है कि अतीत में लोग क्या खाते थे।

  • वनस्पति अवशेष: वनस्पतियों के अवशेष बहुत मुश्किल से बच पाते हैं। यदि अन्न के दाने या लकड़ी के टुकड़े जल जाते हैं, तो वे जले हुए रूप में बचे रहते हैं (इसे कार्बनीकरण कहते हैं)।


5. तिथियों का मतलब (Time Line & Dating)

इतिहास में तारीखों को समझने के लिए एक विशेष प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिसे ईसा मसीह के जन्म से जोड़ा गया है।

महत्वपूर्ण शब्दावली:

  1. BC (Before Christ):

    • हिंदी में: ई.पू. (ईसा पूर्व)।

    • अर्थ: ईसा मसीह के जन्म के पहले का समय।

    • इसमें वर्षों की गिनती उल्टी दिशा में होती है।

  2. AD (Anno Domini):

    • हिंदी में: ई. (ईस्वी)।

    • अर्थ: 'ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से'।

    • लैटिन शब्द 'Anno Domini' का शाब्दिक अर्थ है "In the year of the Lord"।

  3. CE (Common Era):

    • आजकल AD की जगह CE का प्रयोग होता है।

    • यह दर्शाता है कि यह कैलेंडर दुनिया के अधिकांश देशों में मान्य है।

  4. BCE (Before Common Era):

    • BC की जगह BCE का प्रयोग होता है।

  5. BP (Before Present):

    • हिंदी में: वर्तमान से पहले।

    • वैज्ञानिक डेटिंग (जैसे कार्बन डेटिंग) में इसका प्रयोग अक्सर होता है।

गणितीय उदाहरण:

यदि वर्तमान वर्ष $2026$ है और हम $2500$ वर्ष पूर्व की बात कर रहे हैं, तो:

$$\text{Year} = 2026 - 2500$$

(यह गणना सीधे नहीं होती, बल्कि संदर्भ के लिए: $2500$ वर्ष पूर्व का अर्थ लगभग $500$ BC होगा)।


6. अतीत: एक या अनेक?

NCERT की पुस्तक का शीर्षक "हमारे अतीत" (Our Pasts) है, यहाँ 'अतीत' शब्द का प्रयोग बहुवचन के रूप में किया गया है।

  • अलग-अलग समूहों के लिए अलग अतीत: पशुपालकों या कृषकों का जीवन राजाओं और रानियों के जीवन से बहुत भिन्न था। व्यापारियों का जीवन शिल्पकारों के जीवन से बहुत अलग था।

  • उदाहरण: आज भी अंडमान द्वीप के लोग अपना अधिकांश भोजन मछली पकड़कर, शिकार करके और फल-फूल के संग्रह द्वारा प्राप्त करते हैं, जबकि शहरों में रहने वाले लोग खाद्य आपूर्ति के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।

  • रिकॉर्ड में अंतर: राजा-महाराजा अपनी विजयों का लेखा-जोखा रखते थे (प्रशस्तियाँ, अभिलेख), लेकिन शिकारी, मछुआरे, संग्राहक, कृषक या पशुपालक जैसे आम लोग अपने कार्यों का लेखा-जोखा प्रायः नहीं रखते थे। पुरातत्व की सहायता से हमें उनके जीवन को जानने में मदद मिलती है।


7. महत्वपूर्ण तिथियाँ और तथ्य (Revision Summary)

परीक्षा के लिए निम्नलिखित तिथियों को याद रखना आवश्यक है:

  • कृषि का आरंभ: $8000$ वर्ष पूर्व (सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ)।

  • सिंधु सभ्यता के प्रथम नगर: $4700$ वर्ष पूर्व (लगभग $2700$ BC)।

  • गंगा घाटी के नगर और मगध का उत्कर्ष: $2500$ वर्ष पूर्व (लगभग $500$ BC)।

  • पांडुलिपि लेखन: मुख्य रूप से ताड़पत्र और भुर्ज छाल पर।

  • अभिलेख: पत्थर और धातु जैसी कठोर सतहों पर।

  • रोसेटा स्टोन: मिस्र (Egypt) में पाया गया एक पत्थर जिस पर एक ही लेख तीन अलग-अलग भाषाओं/लिपियों में (यूनानी और मिस्र की दो प्रकार की लिपियाँ) लिखा है। यह प्राचीन लिपियों को पढ़ने (Decipherment) का एक उदाहरण है। विद्वानों ने देखा कि राजाओं और रानियों के नाम एक छोटे से फ्रेम में दिखाए गए हैं, जिसे 'कारतूस' कहा जाता है।


8. इतिहास अध्ययन की विधियाँ (Pedagogy Corner)

CTET परीक्षा में इतिहास शिक्षण शास्त्र (Pedagogy) से भी प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • स्रोतों का उपयोग: छात्रों को यह समझाना कि इतिहासकार जासूस की तरह साक्ष्यों का उपयोग करते हैं।

  • निरंतरता और परिवर्तन: इतिहास केवल तारीखें नहीं है, बल्कि यह समय के साथ समाज में आए बदलावों और निरंतरता (Continuity and Change) को समझने का माध्यम है।

  • ऐतिहासिक कल्पना: छात्रों को अतीत के लोगों के जीवन की कल्पना करने के लिए प्रोत्साहित करना (जैसे- "यदि आप 4000 साल पहले एक सिंधु शहर में होते, तो आपका जीवन कैसा होता?")।

  • कारण और प्रभाव: ऐतिहासिक घटनाओं के कारणों और उनके प्रभावों का विश्लेषण करना।

कब, कहाँ और कैसे?

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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