विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन: अन्तःसम्बन्ध

Sunil Sagare
0

 

1. प्रस्तावना: विषयों के बीच की दीवारें गिराना

वर्तमान शिक्षा प्रणाली, विशेषकर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) के अनुसार, ज्ञान को अलग-अलग टुकड़ों में बाँटने के बजाय उसे समग्र रूप में देखने पर बल दिया जाता है।

  • एकीकृत दृष्टिकोण: प्राथमिक स्तर पर बच्चे अपने परिवेश को 'विज्ञान' या 'सामाजिक विज्ञान' के रूप में अलग-अलग नहीं देखते, बल्कि वे उसे एक समग्र इकाई के रूप में देखते हैं।

  • होलिस्टिक एजुकेशन (Holistic Education): इसका उद्देश्य बच्चों में ऐसी समझ विकसित करना है जहाँ वे विज्ञान के तथ्यों को समाज की जरूरतों और समस्याओं से जोड़ सकें।

  • दीवारें गिराना: इतिहास, भूगोल, विज्ञान और अर्थशास्त्र के बीच की कठोर सीमाओं को समाप्त कर एक अन्तर्विषयक (Interdisciplinary) समझ बनाना आवश्यक है।


2. विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में सम्बन्ध: एक परिचय

विज्ञान और सामाजिक विज्ञान यद्यपि अध्ययन के दो अलग-अलग क्षेत्र माने जाते हैं, परन्तु मानव जीवन में ये एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं।

  • विज्ञान का समाज पर प्रभाव: आज का समाज 'तकनीकी समाज' है। बिजली, इंटरनेट, चिकित्सा, और परिवहन विज्ञान की देन हैं, लेकिन इनका उपयोग और प्रभाव 'सामाजिक विज्ञान' का विषय है।

  • सामाजिक विज्ञान में वैज्ञानिक विधियाँ: समाजशास्त्र, भूगोल और मनोविज्ञान जैसे विषयों में आँकड़ों का विश्लेषण करने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।

  • उदाहरण:

    • टीकाकरण (Vaccination): यह जीव विज्ञान का विषय है, लेकिन इसे समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचाना और इसके प्रति जागरूकता फैलाना सामाजिक विज्ञान और प्रशासन का कार्य है।


3. सामाजिक विज्ञान की अवधारणा और विकास

सामाजिक विज्ञान समाज की विविध परम्पराओं, गतिविधियों और संरचनाओं का अध्ययन करता है।

  • विषय-वस्तु का स्रोत: यह इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र से अपनी सामग्री ग्रहण करता है।

  • पाठ्यचर्या का इतिहास:

    • 1975 की रूपरेखा: इसमें विषयों को एकीकृत करने की बात कही गई थी, लेकिन फिर भी इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र अलग-अलग पढ़ाए जाते थे।

    • NCF-2000: इसने सूचनाओं के बोझ को कम करने और 'बोधगम्य पाठ्यचर्या' पर बल दिया। इसमें कहा गया कि जटिल से सरल और अमूर्त से मूर्त की ओर बढ़ना चाहिए।

  • परिभाषा (एम.पी. मुफात के अनुसार): "सामाजिक अध्ययन ज्ञान का वह क्षेत्र है, जो युवाओं को आधुनिक सभ्यता के विकास को समझने में सहायता करता है।"

  • लक्ष्य: बच्चों को समाज का एक जिम्मेदार, सक्रिय और चिंतनशील सदस्य बनाना।


4. पर्यावरण अध्ययन (EVS) का एकीकृत स्वरूप

CTET के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण खंड है। प्राथमिक स्तर (कक्षा 3 से 5) पर पर्यावरण अध्ययन को विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का संगम माना जाता है।

  • NCF की सिफारिश: कक्षा 1 और 2 में पर्यावरण अध्ययन को भाषा और गणित के माध्यम से पढ़ाया जाता है। कक्षा 3 से 5 में इसे एक स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाया जाता है।

  • EVS के घटक:

    1. विज्ञान: जैविक और भौतिक पर्यावरण।

    2. सामाजिक अध्ययन: इतिहास, संस्कृति, समाज।

    3. पर्यावरण शिक्षा: संरक्षण और जागरूकता।

  • उद्देश्य: बच्चों को प्राकृतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण के बीच सम्बन्धों को खोजने और समझने योग्य बनाना।


5. पर्यावरण अध्ययन और सामाजिक विज्ञान के विषयों में अन्तर्सम्बन्ध

पर्यावरण अध्ययन किस प्रकार सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विषयों से जुड़ा है, इसके विस्तृत नोट्स नीचे दिए गए हैं:

A. पर्यावरण अध्ययन और इतिहास

इतिहास केवल राजाओं की कहानियाँ नहीं है, यह मानव और पर्यावरण के बदलते रिश्तों की कहानी है।

  • सभ्यताओं का विकास: अधिकतर प्राचीन सभ्यताएँ (जैसे हड़प्पा, मिस्र) नदियों के किनारे विकसित हुईं। यह भौगोलिक और पर्यावरणीय कारक था जिसने इतिहास बनाया।

  • विद्वानों के कथन:

    • त्रिवेलियन: "इतिहास एक विषय ही नहीं, बल्कि एक घर है, जिसमें सभी विषय निवास करते हैं।"

    • जिल्लर: "इतिहास एक केन्द्रित विषय है, जिसके चारों ओर सभी विषय घूम सकते हैं।"

  • काल निर्धारण: ऐतिहासिक वस्तुओं की उम्र का पता लगाने के लिए 'कार्बन डेटिंग' (Carbon Dating) का प्रयोग होता है, जो कि शुद्ध विज्ञान है।

    • रेडियोधर्मी क्षय का सूत्र (गणितीय रूप में):

      $$N(t) = N_0 e^{-\lambda t}$$

      (यहाँ $N(t)$ शेष मात्रा है और $t$ समय है। यह दर्शाता है कि विज्ञान इतिहास को समझने में कैसे मदद करता है।)

B. पर्यावरण अध्ययन और भूगोल

भूगोल और पर्यावरण अध्ययन लगभग एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

  • विषय-वस्तु: जलवायु, मिट्टी, वनस्पति, पहाड़, नदियाँ और प्राकृतिक आपदाएँ भूगोल और EVS दोनों का हिस्सा हैं।

  • मानव-पर्यावरण सम्बन्ध: भूगोल यह बताता है कि भौतिक वातावरण (जैसे रेगिस्तान या पहाड़) वहाँ के लोगों के रहन-सहन, भोजन और संस्कृति को कैसे प्रभावित करता है।

  • उदाहरण:

    • लद्दाख (ठंडा रेगिस्तान): यहाँ के घर पत्थर और गारे के बने होते हैं, छतें समतल होती हैं। यह भौगोलिक आवश्यकता है जो EVS का मुख्य टॉपिक है।

C. पर्यावरण अध्ययन और नागरिक शास्त्र (राजनीति विज्ञान)

एक अच्छे नागरिक का निर्माण करना EVS का एक प्रमुख लक्ष्य है।

  • अधिकार और कर्तव्य: स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार (अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार) एक राजनीतिक और नागरिक मुद्दा है।

  • स्वच्छता और स्वास्थ्य: अपने घर, पड़ोस और शहर को साफ रखना नागरिक शास्त्र का विषय है, लेकिन इसका सीधा असर स्वास्थ्य (विज्ञान) पर पड़ता है।

  • कानून: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, वन अधिकार अधिनियम - ये सभी राजनीति विज्ञान के विषय हैं जो पर्यावरण की रक्षा करते हैं।

D. पर्यावरण अध्ययन और अर्थशास्त्र

अर्थव्यवस्था पूरी तरह से संसाधनों पर निर्भर है, और संसाधन पर्यावरण से आते हैं।

  • आजीविका: कृषि, मत्स्य पालन, खनन - ये सभी आर्थिक क्रियाएँ सीधे पर्यावरण पर निर्भर हैं।

  • संसाधन वितरण: जल, जंगल और जमीन का वितरण अर्थशास्त्र का मुद्दा है, लेकिन इनका संरक्षण EVS का विषय है।

  • सतत विकास (Sustainable Development): आर्थिक विकास ऐसा हो जो पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए। यह आधुनिक अर्थशास्त्र का मूल मंत्र है।


6. पर्यावरण अध्ययन और विज्ञान (Pure Science) में सम्बन्ध

विज्ञान की विभिन्न शाखाएँ EVS के मूल आधार का निर्माण करती हैं।

A. भौतिक विज्ञान (Physics) के साथ सम्बन्ध

  • ऊर्जा के स्रोत: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत। यह EVS का मुख्य विषय है और भौतिकी के नियमों पर आधारित है।

  • बल और घर्षण: वाहन कैसे चलते हैं, हम जमीन पर कैसे चलते हैं - यह भौतिकी है।

  • अवस्था परिवर्तन: जल चक्र (Water Cycle) में वाष्पीकरण और संघनन की प्रक्रियाएँ भौतिक परिवर्तन हैं।

    $$\text{H}_2\text{O}_{(l)} \xrightarrow{\text{Heat}} \text{H}_2\text{O}_{(g)}$$

B. रसायन विज्ञान (Chemistry) के साथ सम्बन्ध

  • प्रदूषण: वायु प्रदूषण में विभिन्न गैसों का अध्ययन किया जाता है।

    • अम्लीय वर्षा (Acid Rain) का कारण:

      $$\text{SO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{H}_2\text{SO}_3$$
  • पदार्थों के गुण: पानी की कठोरता, मृदा की अम्लता (pH मान), धातुओं और अधातुओं का उपयोग।

  • खाद्य संरक्षण: अचार में नमक या सिरका डालना एक रासायनिक प्रक्रिया है जो भोजन को खराब होने से बचाती है।

C. जीव विज्ञान (Biology/Zoology/Botany) के साथ सम्बन्ध

  • पारिस्थितिकी तंत्र: खाद्य श्रृंखला (Food Chain) और खाद्य जाल (Food Web)।

    • उदाहरण: घास $\rightarrow$ टिड्डा $\rightarrow$ मेंढक $\rightarrow$ साँप।

  • जैव विविधता: विभिन्न प्रकार के पौधे और जानवर।

  • शरीर क्रिया विज्ञान: पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, पोषण (विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट)।

  • कृषि विज्ञान: फसल उत्पादन, बीजों का अंकुरण, जैविक खाद का प्रयोग।


7. पर्यावरण अध्ययन का गणित और भाषा के साथ सम्बन्ध

EVS केवल विज्ञान या सामाजिक विज्ञान तक सीमित नहीं है, यह भाषा और गणित से भी जुड़ा है।

  • गणित के साथ सम्बन्ध:

    • आंकड़े: जनसंख्या वृद्धि, तापमान में बदलाव, बारिश की मात्रा को ग्राफ और चार्ट के माध्यम से समझना।

    • मापन: दूरी, समय, वजन। (जैसे - ट्रेन की समय-सारणी को पढ़ना, जो CTET का एक लोकप्रिय प्रश्न है)।

    • अनुपात: नक्शे (Map) पर पैमाना (Scale) समझना।

      • उदाहरण: यदि नक्शे पर 1 cm = 100 km है, तो 5 cm = 500 km।

  • भाषा के साथ सम्बन्ध:

    • अभिव्यक्ति: पर्यावरण के मुद्दों पर कविताएँ, कहानियाँ और नारे लिखना।

    • शब्दावली: वैज्ञानिक शब्दों को समझना और उनका सही प्रयोग करना।

    • साहित्य: लोककथाएँ और कहानियाँ अक्सर पर्यावरण और जानवरों के साथ मानवीय रिश्तों को दर्शाती हैं।


8. शिक्षण-शास्त्र सम्बन्धी मुद्दे (Pedagogical Issues)

शिक्षक के रूप में आपको इन विषयों को कैसे पढ़ाना चाहिए, इसके लिए NCF और शिक्षाशास्त्र के मुख्य बिंदु:

  • स्थानीय संदर्भ (Local Context):

    • पढ़ाते समय उदाहरण हमेशा बच्चे के स्थानीय परिवेश से होने चाहिए।

    • वैश्विक समस्याओं (जैसे ग्लोबल वार्मिंग) को स्थानीय समस्याओं (जैसे गर्मी का बढ़ना, पानी की कमी) से जोड़कर पढ़ाएं।

  • विविधता का सम्मान (Diversity):

    • कक्षा में विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि के बच्चे होते हैं। उनकी संस्कृति, भोजन और त्योहारों को संसाधन के रूप में प्रयोग करें।

    • लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitivity) का ध्यान रखें। रूढ़िवादी धारणाओं को चुनौती दें (जैसे - केवल महिलाएँ ही खाना बनाती हैं)।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास:

    • बच्चों को प्रश्न पूछने ('क्यों' और 'कैसे') के लिए प्रोत्साहित करें।

    • अंधविश्वासों को दूर करें और तर्क आधारित सोच विकसित करें।

    • मूल्य: ईमानदारी, सहयोग, पर्यावरण के प्रति करुणा और न्याय।

  • क्रियाकलाप आधारित अधिगम:

    • अवलोकन (Observation), वर्गीकरण (Classification) और प्रयोग (Experimentation) करने के अवसर दें।

    • रटकर सीखने (Rote Learning) को हतोत्साहित करें।


9. निष्कर्ष: भावी शिक्षक के लिए सन्देश

एक शिक्षक के रूप में, आपका कार्य केवल पाठ्यपुस्तक पूरा करना नहीं है। आपको विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के ज्ञान को जोड़कर बच्चों में एक ऐसी समझ पैदा करनी है जिससे वे:

  1. पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनें।

  2. समाज में व्याप्त असमानताओं (जाति, लिंग, वर्ग) को पहचानें और उन पर सवाल उठाएं।

  3. तार्किक और वैज्ञानिक ढंग से सोचें।


महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य (Quick Revision)

  • NCF-2005 का सूत्र: "बिना बोझ के शिक्षा" (Learning without Burden)।

  • EVS की 6 थीम्स: परिवार और मित्र, भोजन, पानी, आवास, यात्रा, हम चीजें कैसे बनाते हैं।

  • मूल्यांकन: सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) होना चाहिए, न कि केवल पेन-पेपर परीक्षा।

  • एकीकृत EVS: विज्ञान + सामाजिक विज्ञान + पर्यावरण शिक्षा।



विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन: अन्तःसम्बन्ध

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top