मुगल साम्राज्य

Sunil Sagare
0

 

1. मुगल कौन थे? (Who were the Mughals?)

मुगल दो महान शासक वंशों के वंशज थे:

  • माता की ओर से: वे चीन और मध्य एशिया के मंगोल शासक चंगेज खान (मृत्यु 1227) के उत्तराधिकारी थे।

  • पिता की ओर से: वे ईरान, इराक और वर्तमान तुर्की के शासक तैमूर (मृत्यु 1404) के वंशज थे।

  • मुगल अपने को 'मुगल' या 'मंगोल' कहलाना पसंद नहीं करते थे क्योंकि चंगेज खान की स्मृति सैकड़ों व्यक्तियों के नरसंहार से जुड़ी थी।

  • वे तैमूर के वंशज होने पर गर्व महसूस करते थे क्योंकि उनके महान पूर्वज ने 1398 में दिल्ली पर कब्जा कर लिया था।


2. प्रमुख मुगल शासक और उनके कार्यकाल

बाबर (1526 - 1530)

  • बाबर ने 1526 में पानीपत के मैदान में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराया और दिल्ली तथा आगरा पर कब्जा किया।

  • प्रमुख युद्ध:

    1. पानीपत का प्रथम युद्ध (1526): इब्राहिम लोदी को हराया। भारत में मुगल वंश की नींव रखी।

    2. खानवा का युद्ध (1527): राणा सांगा, राजपूत राजाओं और उनके समर्थकों को हराया।

    3. चंदेरी का युद्ध (1528): राजपूतों को हराया।

    4. घाघरा का युद्ध (1529): अफगानों को हराया।

  • बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) तुर्की भाषा में लिखी। इसमें उसने भारत की वनस्पतियों और प्राणियों का वर्णन किया है।

हुमायूँ (1530-1540 और 1555-1556)

  • हुमायूँ ने अपने पिता की वसीयत के अनुसार जायदाद का बंटवारा किया। प्रत्येक भाई को एक-एक प्रांत मिला।

  • शेर खान (शेर शाह सूरी) ने हुमायूँ को दो बार हराया:

    • चौसा का युद्ध (1539)

    • कन्नौज का युद्ध (1540)

  • इन पराजयों के बाद उसे ईरान भागना पड़ा। वहां सफ़ाविद शाह की मदद ली।

  • 1555 में उसने पुनः दिल्ली पर कब्जा किया लेकिन अगले ही वर्ष पुस्तकालय (शेर मंडल) की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मृत्यु हो गई।


3. सूर साम्राज्य: एक संक्षिप्त अंतराल (1540-1555)

शेर शाह सूरी (1540-1545)

  • इसका असली नाम फरीद था।

  • शेर शाह ने प्रशासन में कई सुधार किए जो बाद में अकबर ने अपनाए।

  • उसने 'रुपया' नामक मुद्रा शुरू की।

  • प्रसिद्ध 'ग्रैंड ट्रंक रोड' (सड़क-ए-आजम) का निर्माण और मरम्मत करवाई।


4. अकबर (1556 - 1605): साम्राज्य का विस्तार

अकबर 13 वर्ष की अल्पायु में सम्राट बना। उसका शासनकाल तीन अवधियों में विभाजित किया जा सकता है:

क. 1556-1570 के मध्य:

  • अपने संरक्षक बैरम खान से स्वतंत्र हुआ।

  • पानीपत का द्वितीय युद्ध (1556): अकबर (बैरम खान के नेतृत्व में) ने हेमू को हराया।

  • मालवा और गोंडवाना के विरुद्ध सैन्य अभियान चलाए।

  • 1568 में सिसौदिया राजधानी चित्तौड़ और 1569 में रणथम्भौर पर कब्जा किया।

ख. 1570-1585 के मध्य:

  • गुजरात के विरुद्ध सैनिक अभियान। इसके बाद पूर्व में बिहार, बंगाल और उड़ीसा में अभियान चलाए।

ग. 1585-1605 के मध्य:

  • साम्राज्य का विस्तार। उत्तर-पश्चिम में अभियान।

  • कंधार को सफ़ाविदों से छीन लिया गया, कश्मीर को भी जोड़ लिया गया।

  • मिर्जा हकीम की मृत्यु के बाद काबुल को भी अपने राज्य में मिला लिया।

  • दक्कन में अभियानों की शुरुआत हुई और बरार, खानदेश और अहमदनगर के कुछ हिस्सों को राज्य में मिला लिया गया।


5. जहाँगीर और शाहजहाँ

जहाँगीर (1605 - 1627)

  • अकबर के सैन्य अभियानों को आगे बढ़ाया।

  • मेवाड़ के सिसौदिया शासक अमर सिंह ने मुगलों की सेवा स्वीकार की।

  • सिखों, अहोम्स और अहमदनगर के खिलाफ अभियान चलाए जो पूर्णतः सफल नहीं हुए।

  • जहाँगीर की पत्नी नूरजहाँ (मेहर-उन-निसा) का दरबार में काफी प्रभाव था। उसने नूरजहाँ के नाम पर सिक्के जारी किए।

  • चित्रकला का स्वर्ण काल माना जाता है।

शाहजहाँ (1627 - 1658)

  • दक्कन में मुगल अभियान जारी रहे।

  • अहमदनगर को अंततः राज्य में मिला लिया गया और बीजापुर की सेनाओं ने सुलह के लिए निवेदन किया।

  • स्थापत्य कला का स्वर्ण काल: ताजमहल, लाल किला (दिल्ली), जामा मस्जिद का निर्माण करवाया।

  • 1657-58 में उत्तराधिकार के लिए पुत्रों में झगड़ा हुआ। औरंगजेब की विजय हुई और दारा शिकोह समेत उसके तीन भाइयों को मौत के घाट उतार दिया गया। शाहजहाँ को आगरा के किले में कैद कर दिया गया।


6. औरंगजेब (1658 - 1707)

उत्तर भारत:

  • 1663 में उत्तर-पूर्व में अहोम्स की पराजय हुई, परन्तु उन्होंने 1680 में पुनः विद्रोह कर दिया।

  • उत्तर-पश्चिम में यूसुफजई और सिखों के विरुद्ध अभियान अस्थायी रूप से सफल हुए।

  • मारवाड़ के राठौर राजपूतों ने मुगलों के खिलाफ विद्रोह किया क्योंकि उनकी आंतरिक राजनीति और उत्तराधिकार के मसलों में मुगलों का हस्तक्षेप बढ़ गया था।

  • शिवाजी के विरुद्ध अभियान: शुरुआत में सफल रहे। औरंगजेब ने शिवाजी का अपमान किया और शिवाजी आगरा स्थित मुगल कैदखाने से भाग निकले। उन्होंने अपने को स्वतंत्र शासक घोषित किया और मुगलों के विरुद्ध पुनः युद्ध आरंभ किया।

दक्कन:

  • राजकुमार अकबर ने औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह किया जिसमें उसे मराठों और दक्कन की सल्तनत का सहयोग मिला।

  • औरंगजेब ने बीजापुर (1685) और गोलकुंडा (1687) को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

  • 1698 में औरंगजेब ने दक्कन में मराठों के विरुद्ध अभियान का नेतृत्व स्वयं किया, जो छापामार पद्धति (Guerrilla warfare) का उपयोग कर रहे थे।


7. उत्तराधिकार की मुगल परंपराएँ

मुगल ज्येष्ठाधिकार (Primogeniture) के नियम में विश्वास नहीं करते थे, जिसमें सबसे बड़ा पुत्र ही पिता के राज्य का उत्तराधिकारी होता था।

इसके विपरीत, वे उत्तराधिकार में सहदायाद (Coparcenary) की मुगल और तैमूर वंश की प्रथा को अपनाते थे।

  • नियम: इसमें उत्तराधिकार का विभाजन समस्त पुत्रों में कर दिया जाता था।

  • यही कारण था कि मुगलों में अक्सर उत्तराधिकार के लिए युद्ध होते थे।


8. मुगलों के अन्य शासकों के साथ संबंध

  • मुगलों ने उन शासकों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए जिन्होंने उनकी सत्ता को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

  • जब मुगल शक्तिशाली हो गए तो कई अन्य शासकों (जैसे राजपूत) ने स्वेच्छा से उनकी सत्ता स्वीकार कर ली।

  • विवाह संबंध: अनेकों राजपूतों ने अपनी पुत्रियों का विवाह मुगल घरानों में किया और उच्च पद प्राप्त किए। (जैसे: जहाँगीर की माँ कछवाहा राजकुमारी थी और शाहजहाँ की माँ राठौर राजकुमारी थी)।

  • व्यवहार: पराजित करने के बाद मुगलों द्वारा सम्मानजनक व्यवहार (जागीरें वापस करना) ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। लेकिन औरंगजेब द्वारा शिवाजी का अपमान करना इस नीति का अपवाद था, जिसके गंभीर परिणाम हुए।


9. प्रशासन: मनसबदारी व्यवस्था (Mansabdari System)

जैसे-जैसे साम्राज्य का विस्तार हुआ, मुगलों ने विभिन्न सामाजिक समूहों के सदस्यों को प्रशासन में नियुक्त किया। यह व्यवस्था मनसबदारी प्रथा कहलाती थी।

मुख्य बिंदु:

  • मनसबदार: इसका अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसे कोई सरकारी पद या दर्जा (Mansab) मिला हो। यह मुगलों द्वारा चलाई गई श्रेणी व्यवस्था थी।

  • इस व्यवस्था के जरिए तीन चीजें निर्धारित होती थीं:

    1. पद

    2. वेतन

    3. सैन्य उत्तरदायित्व

जात (Zat) और सवार (Sawar):

  • जात: पद और वेतन का निर्धारण 'जात' की संख्या पर निर्भर था। 'जात' की संख्या जितनी अधिक होती थी, दरबार में अभिजात की प्रतिष्ठा और उसका वेतन उतना ही अधिक होता था।

  • सवार: सैन्य उत्तरदायित्व। मनसबदार को एक निश्चित संख्या में घुड़सवार रखने पड़ते थे।

वेतन अदायगी:

  • मनसबदारों को अपना वेतन राजस्व एकत्रित करने वाली भूमि के रूप में मिलता था, जिसे जागीर कहते थे। (यह इक्ता व्यवस्था के समान थी)।

  • मनसबदार अपनी जागीरों पर नहीं रहते थे, न ही उन पर प्रशासन करते थे। उनके पास केवल राजस्व (Revenue) लेने का अधिकार था। यह राजस्व उनके नौकर उनके लिए एकत्रित करते थे, जबकि वे स्वयं देश के किसी अन्य भाग में सेवारत रहते थे।

नोट: अकबर के शासनकाल में जागीरों का सावधानीपूर्वक आकलन किया जाता था ताकि राजस्व मनसबदार के वेतन के बराबर हो। औरंगजेब के समय तक स्थिति बदल गई; अब प्राप्त राजस्व मनसबदार के वेतन से बहुत कम होता था और जागीर मिलने में भी बहुत देरी होती थी।


10. ज़ब्त और ज़मींदार (Zabt and Zamindars)

मुगलों की आमदनी का प्रमुख साधन किसानों की उपज से मिलने वाला राजस्व था।

  • ज़मींदार: मुगलों के लिए 'ज़मींदार' शब्द का प्रयोग उन सभी मध्यस्थों के लिए किया जाता था जो किसानों से राजस्व एकत्रित करते थे, चाहे वे स्थानीय ग्राम के मुखिया हों या शक्तिशाली सरदार।

  • टोडरमल का बंदोबस्त: अकबर के राजस्व मंत्री टोडरमल ने 10 साल (1570-1580) की कालावधि के लिए कृषि की पैदावार, कीमतों और कृषि भूमि का सावधानीपूर्वक सर्वेक्षण किया।

  • ज़ब्त: प्रत्येक सूबे (प्रांत) को राजस्व मंडलों में बांटा गया और प्रत्येक फसल के लिए राजस्व दर की अलग सूची बनाई गई। राजस्व प्राप्त करने की इस व्यवस्था को 'ज़ब्त' कहा जाता था।

  • यह व्यवस्था उन स्थानों पर प्रचलित थी जहाँ मुगल प्रशासन भूमि का निरीक्षण कर सकता था। गुजरात और बंगाल जैसे प्रांतों में यह संभव नहीं हो पाया।


11. अकबर की नीतियां और धार्मिक विचार

अकबर के प्रशासन का विस्तृत वर्णन अबुल फज़ल द्वारा लिखित अकबरनामा (विशेषकर इसके तीसरे भाग आईन-ए-अकबरी) में मिलता है।

प्रशासनिक विभाजन:

  • साम्राज्य कई प्रांतों में बंटा था, जिन्हें सूबा कहा जाता था।

  • सूबों के प्रशासक सूबेदार कहलाते थे, जो राजनीतिक तथा सैनिक दोनों प्रकार के कार्यों का निर्वाह करते थे।

अधिकारियों के कार्य:

  • दीवान: वित्तीय अधिकारी (Financial Officer)।

  • बख्शी: सैनिक वेतन अधिकारी (Military Paymaster)।

  • सद्र: धार्मिक और धर्मार्थ किए जाने वाले कार्यों का मंत्री।

  • फौजदार: सेनानायक।

  • कोतवाल: नगर का पुलिस अधिकारी।

धार्मिक नीति:

  • अकबर ने फतेहपुर सीकरी में उलेमा, ब्राह्मणों, जेसुइट पादरियों और ज़रदुश्त धर्म के अनुयायियों के साथ इबादतखाना में धर्म पर चर्चा की।

  • उसने अनुभव किया कि जो विद्वान धार्मिक रीति और अंधविश्वास पर बल देते हैं, वे अक्सर कट्टर होते हैं।

  • सुलह-ए-कुल (Sulh-i-kul): अकबर ने 'सर्वत्र शांति' (Universal Peace) के विचार को अपनाया। यह नीति विभिन्न धर्मों के अनुयायियों में अंतर नहीं करती थी, बल्कि इसका केंद्र बिंदु 'नीतिशास्त्र' (Ethics) की एक व्यवस्था थी जो सभी जगह लागू की जा सकती थी - जिसमें सच्चाई, न्याय और शांति शामिल थी।

  • जहाँगीर और शाहजहाँ ने भी इस नीति का पालन किया।


12. 17वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य और उसके बाद

  • मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक और सैनिक कुशलता के कारण आर्थिक और वाणिज्यिक समृद्धि में वृद्धि हुई।

  • विदेशी यात्रियों ने इसे 'सोने की चिड़िया' जैसा धनी देश बताया, लेकिन उन्होंने यहाँ की भीषण गरीबी को भी देखा।

  • असमानता: शाहजहाँ के शासनकाल के दस्तावेजों से पता चलता है कि कुल 8000 मनसबदारों में से केवल 445 ही उच्च श्रेणी के थे। कुल राजस्व का 61.5% हिस्सा केवल इन 5.6% मनसबदारों और उनके सवारों पर खर्च होता था।

  • मुगल सम्राट और उनके मनसबदार अपनी आय का बहुत बड़ा भाग वेतन और वस्तुओं पर लगा देते थे, जिससे शिल्पकारों और किसानों को लाभ होता था, लेकिन राजस्व का भार इतना अधिक था कि प्राथमिक उत्पादकों (किसान/शिल्पकार) के पास निवेश के लिए बहुत कम धन बचता था।


13. मुगल वास्तुकला (Mughal Architecture)

मुगल वास्तुकला जटिल और भव्य थी। इसमें फ़ारसी और भारतीय शैलियों का मिश्रण था।

  • चारबाग शैली: बगीचे दीवारों से घिरे होते थे और कृत्रिम नहरों द्वारा चार भागों में विभाजित आयताकार अहाते में स्थित थे। चार समान हिस्सों में बंटे होने के कारण इन्हें 'चारबाग' कहा जाता था।

  • हुमायूँ का मकबरा: इसमें पहली बार ऊंचे केंद्रीय गुंबद और मेहराबदार प्रवेश द्वार (पिशताक) का प्रयोग हुआ।

  • शाहजहाँ के निर्माण:

    • दीवान-ए-खास और दीवान-ए-आम: दिल्ली के लाल किले में बनाए गए। इन्हें 'चिहिल सुतुन' (40 खंभों का सभा भवन) भी कहा जाता था।

    • पितरा दूरा (Pietra Dura): यह उत्कीर्णित संगमरमर या बलुआ पत्थर पर रंगीन, ठोस पत्थरों को दबाकर बनाए गए सुंदर तथा अलंकृत नमूने होते थे। शाहजहाँ के सिंहासन के पीछे पितरा दूरा के जड़ाऊ काम की एक श्रृंखला बनाई गई थी।

    • ताजमहल: सफेद संगमरमर से बना, यमुना नदी के तट पर स्थित। इसमें बाग नदी के तट पर था, न कि मकबरे के सामने। इसे 'नदी-तट बाग' योजना कहा जाता था।


14. क्षेत्रीय संस्कृतियों पर प्रभाव

  • मुगलों ने क्षेत्रीय स्थापत्य कला शैलियों को अपनाया।

  • बंगाल: स्थानीय शासकों ने छप्पर की झोपड़ी जैसी दिखने वाली छत (बांग्ला गुंबद) का निर्माण करवाया था, जिसे मुगलों ने अपनी वास्तुकला में शामिल किया।

  • फतेहपुर सीकरी: यहाँ की कई इमारतों पर गुजरात और मालवा की वास्तुकला का प्रभाव दिखता है।


15. शब्दावली (महत्वपूर्ण)

  1. वंशावली (Genealogy): पीढ़ियों का इतिहास।

  2. दोग़मा (Dogma): ऐसा वक्तव्य जिसे बिना किसी तर्क के सत्य मान लिया जाए (कट्टरता)।

  3. बिगॉट (Bigot): एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी धार्मिक मान्यताओं के प्रति बहुत कट्टर हो और दूसरों के विचारों के प्रति असहिष्णु हो।


परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Quick Facts)

तथ्यविवरण
बाबरनामा की भाषातुर्की (चगताई)
अकबरनामा के लेखकअबुल फज़ल
मनसबदारी की शुरुआतअकबर
सुलह-ए-कुल की नीतिअकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ
शिवाजी का अपमानऔरंगजेब द्वारा
अंतिम शक्तिशाली मुगलऔरंगजेब (मृत्यु 1707)
नादिर शाह का आक्रमण1739 (दिल्ली को लूटा)

CTET अभ्यास के लिए निर्देश:

इस अध्याय से प्रश्न मुख्य रूप से "कथन (Assertion) और कारण (Reasoning)" या "सही मिलान" के रूप में पूछे जाते हैं। विशेष रूप से मनसबदारी व्यवस्था और सुलह-ए-कुल की अवधारणा को गहराई से समझें।



मुगल साम्राज्य

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

Time Left: 20:00

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top