मानचित्र

Sunil Sagare
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1. मानचित्र: एक परिचय

मानचित्र पृथ्वी की सतह या उसके एक भाग का पैमाने के माध्यम से चपटी सतह पर खींचा गया चित्र है। ग्लोब पृथ्वी का एक लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप है, लेकिन जब हमें पूरी पृथ्वी की जगह उसके किसी एक भाग (जैसे- देश, राज्य, जिले या गाँव) का अध्ययन करना होता है, तो ग्लोब की तुलना में मानचित्र अधिक उपयोगी सिद्ध होते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • मानचित्र में गोलाकार पृथ्वी को एक समतल सतह पर प्रदर्शित किया जाता है।

  • चूँकि पृथ्वी गोल है, इसलिए उसे पूरी तरह से चपटा करना असंभव है, अतः मानचित्र में कुछ विकृतियाँ (Distortions) हो सकती हैं।

  • जब बहुत से मानचित्रों को एक साथ रख दिया जाता है, तब वह एक एटलस (Atlas) बन जाता है।


2. मानचित्र के प्रकार

कार्यों और सूचनाओं के आधार पर मानचित्रों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है। CTET में अक्सर उदाहरण देकर पूछा जाता है कि यह किस प्रकार का मानचित्र है।

(A) भौतिक मानचित्र (Physical Maps)

पृथ्वी की प्राकृतिक आकृतियों को दर्शाने वाले मानचित्रों को भौतिक या 'उच्चावच मानचित्र' कहा जाता है।

  • क्या दर्शाते हैं: पर्वत, पठार, मैदान, नदियाँ, महासागर इत्यादि।

  • पहचान: इसमें सीमाओं की बजाय प्राकृतिक भू-भागों पर जोर दिया जाता है।

(B) राजनीतिक मानचित्र (Political Maps)

वे मानचित्र जो मनुष्यों द्वारा बनाई गई सीमाओं को दर्शाते हैं।

  • क्या दर्शाते हैं: गाँव, शहर, नगर, राज्य और विश्व के विभिन्न देशों तथा उनकी सीमाओं को।

  • पहचान: इसमें राज्यों और देशों के बीच की लाइनें (बॉर्डर) स्पष्ट होती हैं।

(C) थीमेटिक मानचित्र (Thematic Maps)

ये मानचित्र किसी 'विशेष जानकारी' पर केंद्रित होते हैं। इनका नाम उसी जानकारी के आधार पर रखा जाता है जो वे प्रदान करते हैं।

  • उदाहरण:

    • सड़क मानचित्र (Road Maps)

    • वर्षा मानचित्र (Rainfall Maps)

    • वन तथा उद्योगों के वितरण वाले मानचित्र

    • जनसंख्या घनत्व मानचित्र


3. मानचित्र के घटक (Components of Maps)

किसी भी मानचित्र के निर्माण और अध्ययन के लिए तीन मुख्य घटक आवश्यक होते हैं: दूरी, दिशा और प्रतीक।

घटक 1: दूरी (Distance)

मानचित्र एक आरेखण है जो पूरे विश्व या उसके एक भाग को छोटा कर कागज के एक पन्ने पर दर्शाता है। इस छोटे आकार को वास्तविक आकार के साथ सही अनुपात में रखने के लिए 'पैमाना' (Scale) का उपयोग किया जाता है।

पैमाना (Scale) क्या है?

पैमाना स्थल पर वास्तविक दूरी और मानचित्र पर दिखाई गई दूरी के बीच का अनुपात होता है।

$$\text{Scale} = \frac{\text{Map Distance}}{\text{Ground Distance}}$$

उदाहरण:

यदि आपके स्कूल और घर के बीच की दूरी $10 \text{ km}$ है, और मानचित्र पर इसे $2 \text{ cm}$ से दर्शाया गया है:

$$1 \text{ cm} = 5 \text{ km}$$

इसका अर्थ है कि मानचित्र का $1 \text{ cm}$ जमीन के $5 \text{ km}$ को दर्शाता है।

पैमाने के आधार पर मानचित्र के प्रकार:

  1. छोटे पैमाने वाला मानचित्र (Small Scale Map):

    • जब बड़े क्षेत्रफल वाले भागों (जैसे महाद्वीपों या देशों) को कागज पर दिखाना होता है।

    • इसमें $5 \text{ cm}$ बराबर $500 \text{ km}$ हो सकता है।

    • विशेषता: इसमें जानकारी कम होती है।

  2. बड़े पैमाने वाला मानचित्र (Large Scale Map):

    • जब छोटे क्षेत्रफल वाले भागों (जैसे गाँव या शहर) को कागज पर दिखाना होता है।

    • इसमें $5 \text{ cm}$ बराबर $500 \text{ meters}$ हो सकता है।

    • विशेषता: बड़े पैमाने वाले मानचित्र में छोटे पैमाने वाले मानचित्र की अपेक्षा अधिक जानकारी प्राप्त होती है।


घटक 2: दिशा (Direction)

अधिकतर मानचित्रों में ऊपर दाहिनी तरफ एक तीर का निशान बना होता है, जिसके ऊपर 'उ' (N) लिखा होता है। यह तीर उत्तर दिशा को दर्शाता है। इसे उत्तर रेखा कहा जाता है।

प्रधान दिग्बिंदु (Cardinal Points)

चार मुख्य दिशाओं को प्रधान दिग्बिंदु कहा जाता है:

  1. उत्तर (North)

  2. दक्षिण (South)

  3. पूर्व (East)

  4. पश्चिम (West)

बीच की दिशाएँ (Intermediate Directions)

सही स्थिति का पता लगाने के लिए चार अन्य दिशाओं का प्रयोग होता है:

  • उत्तर-पूर्व (North-East)

  • दक्षिण-पूर्व (South-East)

  • दक्षिण-पश्चिम (South-West)

  • उत्तर-पश्चिम (North-West)

दिकसूचक (Compass):

यह एक यंत्र है जिसकी सहायता से मुख्य दिशाओं का पता लगाया जाता है। इसकी चुंबकीय सुई की दिशा हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में होती है।


घटक 3: प्रतीक (Symbols)

किसी भी मानचित्र पर वास्तविक आकार और प्रकार में विभिन्न आकृतियों (जैसे भवन, सड़कें, पुल, वृक्ष, रेल की पटरियाँ) को बनाना संभव नहीं होता। इसलिए, इन्हें दर्शाने के लिए निश्चित अक्षरों, छायाओं, रंगों, चित्रों और रेखाओं का उपयोग किया जाता है।

रूढ़ चिह्न (Conventional Symbols)

ये वे प्रतीक हैं जिनके उपयोग के संबंध में एक अंतर्राष्ट्रीय सहमति है। दुनिया भर के मानचित्रों में इनका अर्थ समान होता है।

महत्वपूर्ण रंग योजना (Color Scheme):

NCERT के अनुसार, प्राकृतिक आकृतियों को दर्शाने के लिए विशिष्ट रंगों का प्रयोग किया जाता है:

  • नीला रंग: जलाशय (Water bodies) - महासागर, नदियाँ, झीलें।

  • भूरा रंग: पर्वत (Mountains)।

  • पीला रंग: पठार (Plateaus)।

  • हरा रंग: मैदान (Plains)।

कुछ सामान्य प्रतीक:

  • PO: डाकघर

  • PTO: तारघर

  • PS: पुलिस स्टेशन

  • बड़ी लाइन (रेलवे): मोटी काली रेखा।

  • कच्ची सड़क: टूटी हुई रेखाएँ।

  • पक्का सड़क: दो समानांतर सीधी रेखाएँ।


4. रेखाचित्र (Sketch)

रेखाचित्र एक आरेखण है जो पैमाने पर आधारित न होकर याद्दाश्त और स्थानीय प्रेक्षण पर आधारित होता है।

  • उद्देश्य: कभी-कभी किसी क्षेत्र के एक कच्चे आरेखण की आवश्यकता होती है यह बताने के लिए कि कोई विशेष स्थान अन्य स्थानों के सापेक्ष कहाँ है।

  • विशेषता: इसमें पैमाना (Scale) नहीं होता।

  • उदाहरण: यदि आप अपने मित्र को अपने घर का रास्ता समझाने के लिए एक कच्चा नक्शा बनाते हैं, तो उसे रेखाचित्र मानचित्र कहते हैं।


5. खाका (Plan)

खाका एक छोटे क्षेत्र का बड़े पैमाने पर खींचा गया रेखाचित्र है।

  • अंतर: मानचित्र में हम बहुत सी चीजें नहीं दिखा सकते (जैसे कमरे की लंबाई और चौड़ाई)। ऐसी जानकारियों के लिए खाका बनाया जाता है।

  • पैमाना: इसमें बड़े पैमाने का उपयोग होता है (जैसे $1 \text{ cm} = 1 \text{ meter}$)।

  • उदाहरण: किसी भवन का नक्शा या आर्किटेक्ट द्वारा बनाया गया हाउस प्लान।


6. मानचित्र शिक्षण और Pedagogy

CTET परीक्षा में पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत मानचित्र से जुड़े प्रश्न अक्सर बच्चों के कौशल विकास पर केंद्रित होते हैं।

मानचित्रण कौशल (Mapping Skills) से बच्चों में क्या विकसित होता है?

  1. सापेक्ष स्थिति की समझ:

    बच्चे यह समझते हैं कि एक वस्तु दूसरी वस्तु के संदर्भ में कहाँ स्थित है (जैसे- स्कूल घर के उत्तर में है)।

  2. दूरी और दिशा का ज्ञान:

    मानचित्र पढ़ने से बच्चों में अनुमान लगाने और सटीक दिशा पहचानने की क्षमता बढ़ती है।

  3. प्रतीकों की समझ:

    बच्चे अमूर्त चिह्नों (Abstract Symbols) को वास्तविक वस्तुओं के रूप में समझना सीखते हैं।

  4. भू-दृश्य (Landscape) की समझ:

    यह रटने की बजाय स्थान, दूरी और दिशाओं की सापेक्ष स्थिति (Relative Position) को समझने में मदद करता है।

EVS कक्षा में गतिविधि:

शिक्षक बच्चों को अपनी कक्षा या स्कूल का नक्शा बनाने के लिए कह सकते हैं। इसमें बच्चों को मानक प्रतीकों की जगह अपने खुद के प्रतीक (Self-made symbols) बनाने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, ताकि उनकी रचनात्मकता और स्थानिक समझ (Spatial Understanding) का पता चले।


7. सारांश (Quick Revision Points)

  • मानचित्र के तीन घटक हैं: दूरी, दिशा, प्रतीक

  • थीमेटिक मानचित्र विशेष जानकारी देते हैं (सड़क, वर्षा, वन)।

  • भौतिक मानचित्र पर्वत, पठार और मैदान दिखाते हैं।

  • राजनीतिक मानचित्र देशों और राज्यों की सीमाएँ दिखाते हैं।

  • पैमाना मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी का अनुपात है।

  • खाका छोटे क्षेत्र का बड़े पैमाने पर चित्र है।

  • मानचित्र में उत्तर दिशा ऊपर की ओर होती है।

  • नीला रंग पानी के लिए और भूरा रंग पर्वतों के लिए रूढ़ चिह्न है।

  • एटलस विभिन्न प्रकार के मानचित्रों का संग्रह है।



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