ग्लोब: अक्षांश और देशांतर (Globe: Latitude and Longitude)
ग्लोब पृथ्वी का एक लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप है। पृथ्वी पूर्णतः गोलाकार नहीं है। यह उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है और मध्य में थोड़ी उभरी हुई है। ग्लोब पर देशों, महाद्वीपों और महासागरों को उनके सही आकार में दिखाया जाता है।
अक्ष (Axis)
एक सुई ग्लोब में झुकी हुई अवस्था में स्थित होती है जिसे अक्ष कहा जाता है।
ग्लोब पर वे दो बिंदु जिनसे होकर सुई गुजरती है, उत्तर तथा दक्षिण ध्रुव कहलाते हैं।
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
वास्तविक पृथ्वी पर ऐसी कोई सुई नहीं होती। यह अपने अक्ष पर चारों ओर घूमती है, जो एक काल्पनिक रेखा है।
पृथ्वी का अक्ष अपने कक्षीय सतह से $66\frac{1}{2}^\circ$ का कोण बनाता है।
विषुवत वृत्त (Equator)
एक अन्य काल्पनिक रेखा ग्लोब को दो बराबर भागों में बांटती है। इसे विषुवत वृत्त कहा जाता है।
पृथ्वी के उत्तर में स्थित आधे भाग को उत्तरी गोलार्ध और दक्षिण वाले आधे भाग को दक्षिणी गोलार्ध कहा जाता है।
विषुवत वृत्त $0^\circ$ अक्षांश को दर्शाती है।
यह पृथ्वी पर खींचा गया सबसे बड़ा वृत्त है (Great Circle)।
विषुवत वृत्त से ध्रुवों तक स्थित सभी समानांतर वृत्तों को अक्षांश (Latitudes) रेखाएं कहा जाता है।
अक्षांश रेखाएं (Parallels of Latitudes)
अक्षांश रेखाएं वे काल्पनिक रेखाएं हैं जो विषुवत वृत्त के समानांतर पूर्व से पश्चिम की ओर खींची जाती हैं। CTET परीक्षा की दृष्टि से इनके महत्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं:
मापन: अक्षांशों को अंश (Degrees) में मापा जाता है।
दूरी: विषुवत वृत्त से दोनों तरफ ध्रुवों के बीच की दूरी पृथ्वी के चारों ओर के वृत्त का एक चौथाई है। अतः इसका माप होगा $360^\circ$ का $\frac{1}{4}$ यानी $90^\circ$।
उत्तरी और दक्षिणी अक्षांश: विषुवत वृत्त के उत्तर की सभी समानांतर रेखाओं को उत्तरी अक्षांश और दक्षिण की सभी रेखाओं को दक्षिणी अक्षांश कहा जाता है।
आकार: जैसे-जैसे हम विषुवत वृत्त से दूर जाते हैं, अक्षांश रेखाओं का आकार घटता जाता है। ध्रुवों पर यह केवल एक बिंदु ($90^\circ$) के रूप में रह जाता है।
समान दूरी: दो अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी हमेशा समान रहती है। यह दूरी लगभग $111$ किलोमीटर होती है।
महत्वपूर्ण अक्षांश और ताप कटिबंध (Heat Zones)
पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश की प्राप्ति के आधार पर इसे विभिन्न ताप कटिबंधों में बांटा गया है। यह विभाजन महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाओं द्वारा किया जाता है।
1. महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाएं
विषुवत वृत्त ($0^\circ$), उत्तरी ध्रुव ($90^\circ$ उ.) तथा दक्षिणी ध्रुव ($90^\circ$ द.) के अतिरिक्त चार महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाएं और भी हैं:
कर्क रेखा (Tropic of Cancer): उत्तरी गोलार्ध में $23\frac{1}{2}^\circ$ उ.। यह भारत के लगभग मध्य से होकर गुजरती है।
मकर रेखा (Tropic of Capricorn): दक्षिणी गोलार्ध में $23\frac{1}{2}^\circ$ द.।
उत्तर ध्रुव वृत्त (Arctic Circle): विषुवत वृत्त के $66\frac{1}{2}^\circ$ उत्तर में।
दक्षिण ध्रुव वृत्त (Antarctic Circle): विषुवत वृत्त के $66\frac{1}{2}^\circ$ दक्षिण में।
2. पृथ्वी के ताप कटिबंध (Heat Zones of the Earth)
उष्ण कटिबंध (Torrid Zone):
विस्तार: कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के सभी अक्षांशों पर।
विशेषता: सूर्य वर्ष में कम से कम एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है।
तापमान: इस क्षेत्र में सबसे अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है, इसलिए इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है।
शीतोष्ण कटिबंध (Temperate Zone):
विस्तार (उत्तरी गोलार्ध): कर्क रेखा तथा उत्तर ध्रुव वृत्त के बीच।
विस्तार (दक्षिणी गोलार्ध): मकर रेखा तथा दक्षिण ध्रुव वृत्त के बीच।
विशेषता: यहाँ सूर्य कभी भी सिर के ठीक ऊपर नहीं होता है। ध्रुवों की तरफ सूर्य की किरणें तिरछी होती जाती हैं।
तापमान: यहाँ का तापमान मध्यम रहता है।
शीत कटिबंध (Frigid Zone):
विस्तार: उत्तरी गोलार्ध में उत्तर ध्रुव वृत्त एवं उत्तरी ध्रुव के बीच और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण ध्रुव वृत्त एवं दक्षिणी ध्रुव के बीच।
विशेषता: यहाँ सूर्य क्षितिज से ज्यादा ऊपर नहीं आ पाता है। किरणें हमेशा तिरछी पड़ती हैं और कम ऊष्मा देती हैं।
तापमान: यह क्षेत्र बहुत ठंडे रहते हैं और बर्फ से ढके रहते हैं।
देशांतर (Longitudes)
किसी स्थान की सही स्थिति बताने के लिए अक्षांश के अलावा यह जानना भी आवश्यक है कि वह स्थान पूर्व या पश्चिम में कहाँ स्थित है। इसके लिए उत्तर ध्रुव को दक्षिण ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखाओं का उपयोग किया जाता है। इन्हें देशांतर याम्योत्तर (Meridians of Longitude) कहते हैं।
देशांतर रेखाओं की मुख्य विशेषताएं:
अर्धवृत्त: ये रेखाएं अर्धवृत्त होती हैं।
दूरी: इनके बीच की दूरी ध्रुवों की तरफ बढ़ने पर घटती जाती है एवं ध्रुवों पर शून्य हो जाती है, जहाँ सभी देशांतर याम्योत्तर आपस में मिलती हैं।
समान लंबाई: अक्षांश रेखाओं से भिन्न, सभी देशांतर याम्योत्तरों की लंबाई समान होती है। इसलिए इन्हें सिर्फ संख्याओं में व्यक्त करना कठिन था।
संख्या: कुल देशांतर रेखाओं की संख्या $360$ है।
प्रमुख याम्योत्तर (Prime Meridian)
सभी देशों ने निश्चय किया कि ग्रीनविच, जहाँ ब्रिटिश राजकीय वेधशाला स्थित है, से गुजरने वाली याम्योत्तर से पूर्व और पश्चिम की ओर गिनती शुरू की जाए।
मान: इस याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर कहते हैं। इसका मान $0^\circ$ देशांतर है।
विभाजन: यह पृथ्वी को दो समान भागों, पूर्वी गोलार्ध और पश्चिमी गोलार्ध में विभक्त करती है।
पहचान: $180^\circ$ पूर्व और $180^\circ$ पश्चिम याम्योत्तर एक ही रेखा पर स्थित हैं।
ग्रिड (Grid): अक्षांश रेखाओं और देशांतर याम्योत्तरों के जाल को ग्रिड कहते हैं। अगर हमें किसी स्थान के अक्षांश और देशांतर की सही जानकारी हो, तो ग्लोब पर उस स्थान का पता आसानी से लगाया जा सकता है।
देशांतर और समय (Longitude and Time)
समय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी, चंद्रमा और ग्रहों की गति है। स्थानीय समय का अनुमान सूर्य द्वारा बनने वाली परछाई से लगाया जा सकता है, जो दोपहर में सबसे छोटी और सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सबसे लंबी होती है।
समय गणना का गणित:
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
अतः वे स्थान जो ग्रीनविच के पूर्व में हैं, उनका समय ग्रीनविच समय से आगे होगा और जो पश्चिम में हैं, उनका समय पीछे होगा।
पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपने अक्ष पर $360^\circ$ घूम जाती है।
इसका अर्थ है कि वह 1 घंटे में $15^\circ$ घूमती है।
$$\frac{360^\circ}{24 \text{ hours}} = 15^\circ \text{ per hour}$$वह 4 मिनट में $1^\circ$ घूमती है।
$$\frac{60 \text{ minutes}}{15} = 4 \text{ minutes per degree}$$
उदाहरण:
अगर ग्रीनविच में दोपहर के 12 बजे हैं, तो ग्रीनविच से $15^\circ$ पूर्व में समय होगा:
अर्थात, वहां दोपहर का 1 बजा होगा। लेकिन ग्रीनविच से $15^\circ$ पश्चिम में समय ग्रीनविच समय से 1 घंटा पीछे होगा, यानी वहां सुबह के 11 बजे होंगे।
मानक समय (Standard Time)
अलग-अलग याम्योत्तरों पर स्थित स्थानों के स्थानीय समय में अंतर होता है। उदाहरण के लिए, भारत में गुजरात के द्वारका तथा असम के डिब्रूगढ़ के स्थानीय समय में लगभग 1 घंटा 45 मिनट का अंतर है। इसलिए एक देश के मध्य भाग से होकर गुजरने वाली किसी याम्योत्तर के स्थानीय समय को देश का मानक समय माना जाता है।
भारतीय मानक समय (Indian Standard Time - IST)
भारत में $82\frac{1}{2}^\circ$ पू. ($82^\circ 30'$ पू.) को मानक याम्योत्तर माना गया है।
यह रेखा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर (कुछ स्रोतों में प्रयागराज के नैनी) से होकर गुजरती है।
इस याम्योत्तर के स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाता है।
ग्रीनविच से अंतर: भारत ग्रीनविच के पूर्व में $82^\circ 30'$ पू. पर स्थित है।
समय का अंतर गणना:
$$82.5 \times 4 \text{ मिनट} = 330 \text{ मिनट}$$$$330 \text{ मिनट} = 5 \text{ घंटे } 30 \text{ मिनट}$$अतः भारत का समय ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
इसलिए जब लंदन में दोपहर के 2:00 बजे होंगे, तब भारत में शाम के 7:30 बजे होंगे।
अन्य देशों के उदाहरण:
कुछ देशों का देशांतरीय विस्तार अधिक होता है, जिसके कारण वहां एक से अधिक मानक समय अपनाए गए हैं।
रूस: रूस में 11 मानक समयों को अपनाया गया है।
पृथ्वी को एक-एक घंटे वाले 24 समय क्षेत्रों में बांटा गया है। इस प्रकार प्रत्येक समय क्षेत्र $15^\circ$ देशांतर तक के क्षेत्र को घेरता है।
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line)
$180^\circ$ देशांतर रेखा को अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।
यह प्रशांत महासागर के बीचो-बीच से गुजरती है।
यह एक सीधी रेखा नहीं है, बल्कि इसे कई स्थानों पर मोड़ा गया है (Zig-zag) ताकि यह किसी भी देश या द्वीप समूह को दो अलग-अलग तारीखों में न बांट दे।
यदि कोई यात्री इस रेखा को पश्चिम से पूर्व की ओर पार करता है, तो उसे एक दिन का लाभ होता है (तारीख एक दिन पीछे चली जाती है)।
यदि कोई इसे पूर्व से पश्चिम की ओर पार करता है, तो एक दिन कम हो जाता है (तारीख एक दिन आगे बढ़ जाती है)।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Recap for CTET)
सबसे बड़ा अक्षांश: विषुवत वृत्त ($0^\circ$)।
कुल अक्षांश रेखाओं की संख्या: यदि ध्रुवों को बिंदु माना जाए तो $179$ ($89 + 89 + 1$), यदि रेखा माना जाए तो $181$।
दो अक्षांशों के बीच का क्षेत्र: इसे 'कटिबंध' (Zone) कहते हैं।
दो देशांतरों के बीच का क्षेत्र: इसे 'गोर' (Gore) कहा जाता है।
विषुवत वृत्त पर दिन-रात: यहाँ साल भर दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है।
देशांतर और समय: $1^\circ$ देशांतर पार करने में सूर्य को 4 मिनट का समय लगता है।
विषुव (Equinox): 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें विषुवत वृत्त पर सीधी पड़ती हैं। इस अवस्था में कोई भी ध्रुव सूर्य की ओर नहीं झुका होता है, इसलिए पूरी पृथ्वी पर रात और दिन बराबर होते हैं।
महत्वपूर्ण सूत्र (Important Formulas)
समय अंतर गणना:
$$\text{Total Minutes} = \text{Difference in Degrees} \times 4$$घंटे में परिवर्तन:
$$\text{Hours} = \frac{\text{Total Minutes}}{60}$$पूर्व की ओर समय:
$$\text{New Time} = \text{GMT} + \text{Calculated Time}$$पश्चिम की ओर समय:
$$\text{New Time} = \text{GMT} - \text{Calculated Time}$$
यह नोट्स CTET की तैयारी के लिए संक्षिप्त और सटीक हैं। मानचित्र और ग्लोब से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिए अक्षांश और देशांतर की अवधारणाओं का स्पष्ट होना अत्यंत आवश्यक है।
ग्लोब: अक्षांश और देशांतर
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes