मूल्यांकन एवं प्रश्नों का निर्माण

Sunil Sagare
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प्रस्तावना

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में मूल्यांकन का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल अंक प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह जानने का एक माध्यम है कि बच्चे ने कितना सीखा, किस दिशा में सीखा और उसे आगे कैसे सुधारा जा सकता है। शिक्षार्थी की सफलता अथवा असफलता को केवल 'पेपर-पेंसिल टेस्ट' द्वारा निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसलिए, आधुनिक शिक्षा शास्त्र में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन पर जोर दिया जाता है।


1. उपलब्धियों का मूल्यांकन

छात्रों की उपलब्धियों का मूल्यांकन सतत (लगातार) एवं व्यापक (सभी क्षेत्रों में) रूप से होना चाहिए। कक्षा में मूल्यांकन के लिए शिक्षक को विविध विधियों का प्रयोग करना चाहिए। रिपोर्ट तैयार करते समय अंकों के स्थान पर ग्रेडिंग पद्धति का प्रयोग मनोवैज्ञानिक रूप से बेहतर माना जाता है क्योंकि यह अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और तनाव को कम करता है।

ग्रेडिंग पद्धति (उपलब्धि कार्ड हेतु)

विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों की रिपोर्ट तैयार करते समय, समग्र ज्ञान में अप्रत्यक्ष ग्रेडिंग के पाँच बिंदुओं का प्रयोग किया जाता है। स्रोत दस्तावेज के अनुसार, अंकों का वितरण और उनके ग्रेड निम्न प्रकार हैं:

तालिका 1: उपलब्धि ग्रेडिंग चार्ट (प्रतिशत आधार)

ग्रेडअंक (प्रतिशत में)परिणाम
ए+$90\% - 100\%$सर्वोत्कृष्ट (Extraordinary)
$75\% - 89\%$उत्कृष्ट (Excellent)
बी$56\% - 74\%$बहुत अच्छा (Very good)
सी$35\% - 55\%$अच्छा (Good)
डी$35\%$ से कमऔसत (Average)

महत्वपूर्ण निर्देश:

  • बच्चे के ग्रेड उपलब्धि कार्ड में दर्शाए जाने चाहिए।

  • केवल ग्रेड पर्याप्त नहीं हैं; शैक्षिक और सह-शैक्षिक क्षेत्रों में बच्चे की उपलब्धि के स्तर के संबंध में वर्णनात्मक टिप्पणियाँ भी दर्ज की जानी चाहिए।

  • ये टिप्पणियाँ माता-पिता और बच्चे को सुधार की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित करती हैं।


2. मूल्यांकन एवं परीक्षण के प्रकार

उपलब्धियों को मापने की प्रक्रिया को 'उपलब्धि परीक्षण' कहते हैं। इसका प्रयोग शिक्षा, व्यवसाय और तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है। मुख्य रूप से इसे दो भागों में समझा जा सकता है:

क. शिक्षक निर्मित उपलब्धि परीक्षण

यह परीक्षण शिक्षक द्वारा कक्षा में समय-समय पर या अध्याय की समाप्ति पर लिया जाता है।

  • उद्देश्य: विद्यार्थियों में समझ को विकसित करना।

  • लाभ: यह छात्रों के व्यक्तिगत विकास और उन्हें अभिप्रेरित करने के लिए उपयोगी है।

ख. मानकीकृत उपलब्धि परीक्षण

इसे विशेषज्ञों द्वारा बड़े स्तर पर तैयार किया जाता है। इसका विकास कक्षा स्तर पर कौशल तथा ज्ञानार्जन को मापने हेतु किया जाता है।

  • आलोचना: सामान्यतः मानकीकृत परीक्षणों की आलोचना की जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि ये परीक्षण मुख्य धारा की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए इन्हें पक्षपाती परीक्षण भी माना जाता है। ये स्थानीय संदर्भों और व्यक्तिगत भिन्नताओं की अक्सर अनदेखी करते हैं।


3. रचनात्मक मूल्यांकन (Formative Evaluation)

रचनात्मक मूल्यांकन को 'रूपात्मक आकलन' या 'सीखने के लिए आकलन' भी कहा जाता है।

  • उद्देश्य: यह फीडबैक (प्रतिपुष्टि) उपलब्ध कराता है।

  • महत्व: यह विद्यार्थी को अपनी त्रुटियों को समझने और उन्हें दूर करने में सहायता देता है।

  • सैडलर का कथन: रचनात्मक मूल्यांकन में फीडबैक और स्व-मूल्यांकन दोनों सम्मिलित होते हैं।

रचनात्मक मूल्यांकन ग्रेडिंग पैमाना

कार्य अनुभव, कला-शिक्षा, स्वास्थ्य तथा शारीरिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कार्य-निष्पादन का निर्धारण करने के लिए 9-बिंदु वाले पैमाने का प्रयोग किया जाता है, जिसका विवरण रिपोर्ट कार्ड की पिछली ओर दिया जाता है:

तालिका 2: रचनात्मक मूल्यांकन ग्रेडिंग (अंक और ग्रेड पॉइंट)

अंक श्रृंखलाश्रेणी (ग्रेड)श्रेणी बिंदु (ग्रेड प्वॉइण्ट)
$91-100$ए1$10.0$
$81-90$ए2$9.0$
$71-80$बी1$8.0$
$61-70$बी2$7.0$
$51-60$सी1$6.0$
$41-50$सी2$5.0$
$33-40$डी$4.0$
$21-32$ई1-
$00-20$ई2-

रचनात्मक मूल्यांकन का कार्यान्वयन और सिफारिशें

रचनात्मक मूल्यांकन केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। CBSE और शिक्षाविदों द्वारा विषयों के अनुसार विशिष्ट गतिविधियों की सिफारिश की गई है:

  1. विज्ञान: वर्ष में 4 रचनात्मक मूल्यांकनों में से कम-से-कम एक मूल्यांकन प्रयोगों (Experiments) के रूप में होना चाहिए।

  2. गणित: चार मूल्यांकनों में से एक मूल्यांकन गणित प्रयोगशाला क्रियाकलापों पर आधारित होना चाहिए।

  3. सामाजिक विज्ञान: कम-से-कम एक मूल्यांकन परियोजनाओं (Projects) पर आधारित होना चाहिए।

  4. भाषा: श्रवण बोध अथवा वार्तालाप कौशल का मूल्यांकन अनिवार्य है।

नोट: मूल्यांकन के बहुविध मॉडलों (प्रोजेक्ट, क्विज़, असाइनमेंट) का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि लिखित परीक्षाओं पर निर्भरता कम हो सके।


4. प्रश्नों का निर्माण: एक कला

एक शिक्षक के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशल है—'अच्छे प्रश्न बनाना'। बच्चे के ज्ञान, सोच, छवि और भावनाओं का पता लगाने का सबसे उत्कृष्ट तरीका प्रश्न पूछना है।

अच्छे प्रश्नों की तकनीकी विशेषताएँ

एक मानकीकृत या अच्छे प्रश्न पत्र में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:

  1. वैधता (Validity): प्रश्न उसी उद्देश्य की जाँच करे जिसके लिए उसे बनाया गया है। यदि गणित का प्रश्न भाषा की क्लिष्टता के कारण हल न हो पाए, तो वह वैध नहीं है।

  2. विश्वसनीयता (Reliability): बार-बार परीक्षा लेने पर या अलग-अलग शिक्षकों द्वारा जाँचने पर भी परिणामों में स्थिरता रहे।

  3. वस्तुनिष्ठता (Objectivity): प्रश्नों के उत्तर की जाँच पर परीक्षक की व्यक्तिगत राय, मूड या पूर्वाग्रह का प्रभाव न पड़े।

  4. विभेदीकरण (Discrimination): एक अच्छा प्रश्न 'मेधावी' और 'कमजोर' छात्रों के बीच अंतर स्पष्ट करने में सक्षम होना चाहिए (शक्ति का अंतर)।

  5. स्पष्टता और संक्षिप्तता: प्रश्न की भाषा दुविधारहित और छात्र के मानसिक स्तर के अनुरूप होनी चाहिए।


5. प्रश्नों के प्रकार एवं उनका स्वरूप

मूल्यांकन के लिए विविध प्रकार के प्रश्नों का प्रयोग किया जाता है। इन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: निबन्धात्मक, लघु उत्तरीय और अतिलघु उत्तरीय/वस्तुनिष्ठ।

1. निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

  • स्वरूप: छात्र को विस्तृत उत्तर (एक या दो पृष्ठ) लिखना होता है।

  • उपयोग: विचारों के संगठन, विश्लेषण क्षमता, तर्कों की प्रस्तुति और लेखन कौशल को मापने के लिए।

  • उदाहरण: "गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?"

  • दोष: इनमें वस्तुनिष्ठता और विश्वसनीयता की कमी होती है। जाँचने वाले के दृष्टिकोण से अंक बदल सकते हैं।

2. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  • यह निबन्धात्मक और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के बीच का सेतु है।

  • लाभ: ये निबन्धात्मक प्रश्नों की तुलना में अधिक पाठ्यक्रम कवर करते हैं और इनमें विश्वसनीयता भी बेहतर होती है।

  • उदाहरण: "पौधे और जानवरों में चार अंतर बताइए।"

3. अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  • इनका उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में होता है। यह विषय-वस्तु के मूल को समझने और अधिकतम विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए होते हैं।

अतिलघु/वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के विभिन्न रूप:

  • रिक्त स्थान पूर्ति:

    • उदाहरण: "पृथ्वी के ऊपरी भाग को _______ कहते हैं।" (भू-पर्पटी)

  • चित्रात्मक प्रश्न (Picture Based):

    • प्राथमिक स्तर पर ज्ञान की जाँच के लिए सर्वोत्तम।

    • उदाहरण: चित्र दिखाकर पूछना, "यह व्यक्ति क्या व्यवसाय करता है?"

  • निर्वचनात्मक प्रश्न (Interpretative Questions):

    • इसमें कोई नक्शा, ग्राफ या समय-सारणी (Time-table) दी जाती है। छात्र को डेटा का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालना होता है।

    • उदाहरण: बस की समय-सारणी देखकर बताना कि सबसे कम समय किस बस को लगता है।

  • मिलान प्रश्न (Matching Type):

    • इसमें दो स्तंभों का मिलान करना होता है।

    • एकल मिलान: सामान्य दो सूचियाँ।

    • दोहरा मिलान: तीन सारणियाँ होती हैं (जैसे- जानवर, उनका व्यवहार, और भोजन) जिनका आपस में संबंध जोड़ना होता है।

4. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

वे प्रश्न जिनके एक से अधिक विकल्प हों और उत्तर निश्चित हो।

  • बहु-विकल्पीय (MCQ): चार विकल्पों में से सही चुनना।

  • सत्य/असत्य: तथ्यों की सटीकता जाँचने के लिए।


6. आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking)

आधुनिक शिक्षा में रटने के बजाय 'आलोचनात्मक चिंतन' पर बल दिया जाता है।

  • परिभाषा: यह चिंतन की एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत किसी भी वस्तु या विषय के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों पहलुओं के बारे में विचार किया जाता है।

  • उदाहरण: यदि छात्र किसी तथ्य को ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेता है, तो उसमें आलोचनात्मक चिंतन नहीं है। परन्तु यदि वह फुटबॉल खरीदते समय उसकी मजबूती, कीमत और गुणवत्ता (गुण-दोष) की जाँच करता है, तो यह आलोचनात्मक चिंतन है।

  • प्रश्न का स्वरूप: "क्या प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना उचित है? तर्क सहित उत्तर दें।" (यह प्रश्न आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है)।


7. गणित और विज्ञान में प्रश्न उदाहरण

विषय के अनुसार प्रश्नों की प्रकृति बदलनी चाहिए।

गणित उदाहरण:

छात्रों की तार्किक क्षमता जाँचने के लिए:

$$\begin{array}{r l} 5 ) & 26 \quad ( 5 \\ - & 25 \\ \hline & 1 \end{array}$$

प्रश्न: "उपरोक्त भाग की प्रक्रिया में शेषफल (Remainder) क्या है?"

विज्ञान उदाहरण:

मिलान प्रश्न (विटामिन और रोग):

  • विटामिन ए $\rightarrow$ रतौंधी

  • विटामिन सी $\rightarrow$ स्कर्वी

  • विटामिन डी $\rightarrow$ रिकेट्स


निष्कर्ष

मूल्यांकन का अंतिम लक्ष्य बच्चे का सर्वांगीण विकास करना है। प्रधानाचार्य, अध्यापक और माता-पिता को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए कि मूल्यांकन बच्चे के लिए 'भय' न बनकर 'सुधार' का साधन बने। शिक्षक को 'सीखने के मूल्यांकन' (Assessment of Learning) के बजाय 'सीखने के लिए मूल्यांकन' (Assessment for Learning) पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जिसमें निदानात्मक और उपचारात्मक शिक्षण शामिल हो।



मूल्यांकन एवं प्रश्नों का निर्माण

Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes

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