1. जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Jean Piaget's Cognitive Development Theory)
जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के एक मनोवैज्ञानिक थे। बाल विकास के क्षेत्र में उनके योगदान को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुख्य बिंदु (Key Points)
उग्र रचनावादी (Radical Constructivist): पियाजे का मानना था कि बच्चे अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं करते हैं।
जेनेटिक एपिस्टेमोलॉजिस्ट (Genetic Epistemologist): उन्होंने विकास में 'अनुवांशिकता' (Heredity/Biology) और जैविक परिपक्वता को अत्यधिक महत्व दिया।
नन्हे वैज्ञानिक (Little Scientists): पियाजे के अनुसार, बच्चे "नन्हे वैज्ञानिक" हैं जो सक्रिय रूप से खोजबीन करके दुनिया के बारे में अपनी समझ विकसित करते हैं।
विकास की प्रकृति: पियाजे के अनुसार विकास असतत (Discontinuous) है, यानी यह अलग-अलग चरणों (Stages) में होता है, निरंतर नहीं।
विकास के 4 तत्व (Factors of Development - MESE)
पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास के लिए चार तत्वों को जिम्मेदार माना:
Maturation (परिपक्वता): यह अनुवांशिकता से संबंधित है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, बच्चे की जैविक क्षमताएं विकसित होती हैं।
Experience (अनुभव/Activity): बच्चा भौतिक दुनिया के साथ क्रिया करके सीखता है।
Social Interaction (सामाजिक अंतःक्रिया): दूसरों के साथ बातचीत करना (हालाँकि वाइगोत्सकी की तुलना में पियाजे ने इसे कम महत्व दिया)।
Equilibration (संतुलन): यह सूचनाओं को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है।
स्कीमा (Schema)
यह ज्ञान की मानसिक संरचना है।
इसे 'पॉकेट्स ऑफ इंफॉर्मेशन' (Pockets of Information) भी कहा जाता है।
बच्चे के दिमाग में चीजों को पहचानने और समझने के लिए जो पहले से बनी हुई धारणाएं होती हैं, वे स्कीमा कहलाती हैं।
अनुकूलन की प्रक्रिया (Process of Adaptation)
अनुकूलन का अर्थ है वातावरण के साथ तालमेल बिठाना। इसके दो मुख्य भाग हैं:
1. आत्मसातकरण (Assimilation)
पूर्व ज्ञान (पुराने स्कीमा) में नई जानकारी को ज्यों का त्यों जोड़ना।
उदाहरण: एक बच्चे ने सफेद कुत्ता देखा और सीखा कि इसे "कुत्ता" कहते हैं। बाद में उसने एक काला कुत्ता देखा और उसे भी "कुत्ता" कहा। यहाँ उसने नई जानकारी को पुराने ज्ञान में जोड़ लिया।
2. समायोजन (Accommodation)
जब पुरानी जानकारी काम न आए, तो अपने स्कीमा (चिंतन के तरीके) में परिवर्तन या संशोधन करना।
उदाहरण: बच्चे ने बिल्ली देखी और उसे भी "कुत्ता" कहा (क्योंकि उसके पास 4 पैर थे)। लेकिन जब उसने बिल्ली की आवाज़ (म्याऊँ) सुनी, तो उसने अपने स्कीमा में बदलाव किया कि हर 4 पैरों वाला जानवर कुत्ता नहीं होता।
संतुलन (Equilibrium): जब बच्चे की पुरानी जानकारी और नई जानकारी में विरोधाभास न हो, तो वह संतुलन की स्थिति में होता है।
संज्ञानात्मक विकास की 4 अवस्थाएं (4 Stages of Cognitive Development)
पियाजे ने विकास को चार चरणों में विभाजित किया है। यह सार्वभौमिक (Universal) हैं, यानी दुनिया के सभी बच्चों पर लागू होते हैं।
1. संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage)
आयु: 0 से 2 वर्ष
इंद्रियां ही शिक्षक हैं: बच्चा अपनी आँखों, कानों और हाथों के माध्यम से सीखता है।
वस्तु स्थायित्व (Object Permanence): इस अवस्था के अंत तक बच्चे में यह समझ आ जाती है कि अगर कोई वस्तु दिखाई नहीं दे रही है, तो भी उसका अस्तित्व है (छिपी हुई वस्तु को ढूँढना)।
विलंबित अनुकरण (Deferred Imitation): बच्चा बड़ों को देखकर उनके व्यवहार की नकल करना सीखता है (जैसे- फोन पर बात करने की नकल)।
लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार (Goal-directed Behavior): किसी खिलौने को पाने के लिए जानबूझकर हाथ-पैर चलाना।
2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage)
आयु: 2 से 7 वर्ष
तर्क की कमी (Lack of Logic): बच्चा अभी तार्किक रूप से नहीं सोच पाता।
जीववाद (Animism): निर्जीव वस्तुओं को सजीव समझना। (उदाहरण: "मेज़ ने मुझे मारा, इसे भी मारो।")
अहमकेंद्रितता (Egocentrism): बच्चा सोचता है कि जैसा वह महसूस कर रहा है, पूरी दुनिया वैसा ही महसूस कर रही है।
अपरिवर्तनीयता (Irreversibility): बच्चा प्रक्रिया को उल्टा करके नहीं सोच पाता। (उदाहरण: वह समझता है कि पानी से बर्फ बन सकती है, लेकिन यह नहीं समझ पाता कि बर्फ पिघलकर वापस पानी बन जाएगी)।
केंद्रीकरण (Centration): किसी चीज़ की केवल एक विशेषता पर ध्यान देना (जैसे- यह देखना कि गिलास लंबा है, लेकिन यह न देखना कि वह पतला भी है)।
3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage)
आयु: 7 से 11 वर्ष
मूर्त तर्क (Concrete Logic): जो चीजें सामने (मूर्त रूप में) मौजूद हैं, उनके बारे में बच्चा तार्किक रूप से सोच सकता है।
संरक्षण (Conservation): यह समझ आना कि आकार बदलने से वस्तु की मात्रा नहीं बदलती। (उदाहरण: चौड़े गिलास का पानी पतले गिलास में डालने पर भी पानी उतना ही रहेगा)।
वर्गीकरण (Classification): वस्तुओं को उनके गुणों (रंग, आकार) के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटना।
क्रमबद्धता (Seriation): चीजों को घटते या बढ़ते क्रम में लगाना।
वि-केंद्रीकरण (Decentration): वस्तु के कई पहलुओं को एक साथ देख पाना।
4. अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage)
आयु: 11 से 15 वर्ष (वयस्कता तक)
अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking): उन चीजों के बारे में भी सोचना जो सामने नहीं हैं।
परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive Reasoning): समस्याओं का समाधान करने के लिए परिकल्पना बनाना और नियमों के आधार पर निष्कर्ष निकालना।
यह संज्ञानात्मक विकास का सर्वोच्च स्तर है।
2. लेव वाइगोत्सकी का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Lev Vygotsky's Socio-Cultural Theory)
वाइगोत्सकी एक रूसी मनोवैज्ञानिक थे। उन्हें सामाजिक रचनावादी (Social Constructivist) कहा जाता है।
मुख्य विचार (Key Concepts)
विकास की प्रकृति: वाइगोत्सकी के अनुसार विकास एक सतत (Continuous) प्रक्रिया है।
SCL सिद्धांत: इन्होंने विकास में तीन चीजों को सबसे महत्वपूर्ण माना:
Society (समाज)
Culture (संस्कृति)
Language (भाषा)
वाइगोत्सकी के अनुसार, अधिगम (Learning) विकास (Development) से पहले होता है। यानी सामाजिक अधिगम से ही विकास संभव है।
महत्वपूर्ण शब्दावली
1. समीपस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD - Zone of Proximal Development)
यह "बच्चा जो खुद कर सकता है" और "जो वह किसी की मदद से कर सकता है" के बीच का अंतर है।
उदाहरण: एक बच्चा साइकिल के पैडल मार सकता है लेकिन संतुलन नहीं बना सकता। पिता के पकड़ने पर वह चला लेता है। यह बीच का क्षेत्र ZPD है।
2. पाड़/मचान (Scaffolding)
सीखने के दौरान दी जाने वाली अस्थायी मदद (Temporary Help)।
यह मदद तब तक दी जाती है जब तक बच्चा खुद करने में सक्षम न हो जाए।
उदाहरण: संकेत देना, इशारा करना, समस्या को आधा हल कर देना, प्रोत्साहन देना।
3. अधिक जानकार अन्य (MKO - More Knowledgeable Other)
वह व्यक्ति जो सीखने वाले से उस विशिष्ट विषय में अधिक ज्ञान रखता है।
यह शिक्षक, माता-पिता, या यहाँ तक कि सहपाठी (Peer) भी हो सकता है।
भाषा और विचार (Language and Thought)
वाइगोत्सकी के अनुसार भाषा केवल बातचीत का साधन नहीं है, बल्कि यह संज्ञान (दिमाग) को विकसित करने का एक उपकरण (Tool) है।
शुरुआती स्थिति: जन्म के समय भाषा और विचार अलग-अलग होते हैं, लेकिन लगभग 3 साल की उम्र में वे आपस में मिल जाते हैं।
निज वाक् (Private Speech): (3 से 6 वर्ष) जब बच्चा खुद से बोल-बोलकर बातें करता है। पियाजे इसे 'अहमकेंद्रित' कहते हैं, लेकिन वाइगोत्सकी इसे महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार, बच्चा इसके जरिए अपने कार्यों को दिशा (Self-regulation) देता है।
अधिगम के तरीके
सहयोगात्मक अधिगम (Cooperative Learning): समूह में एक-दूसरे की मदद करके सीखना।
पारस्परिक शिक्षण (Reciprocal Teaching): इसमें शिक्षक और छात्र संवाद करते हैं। इसके चार चरण हैं - प्रश्न पूछना, स्पष्ट करना, सारांश बनाना और भविष्यवाणी करना।
3. लॉरेंस कोलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत (Lawrence Kohlberg's Moral Development Theory)
कोलबर्ग ने पियाजे के विचारों को आगे बढ़ाया। उनका सिद्धांत यह बताता है कि बच्चे और वयस्क कैसे तय करते हैं कि क्या सही है और क्या गलत।
मुख्य आधार
नैतिक दुविधा (Moral Dilemma): ऐसी स्थिति जहाँ सही और गलत के बीच चुनाव करना मुश्किल हो। (प्रसिद्ध उदाहरण: "हाइन्ज़ की दुविधा" - क्या हाइन्ज़ को अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए महंगी दवा चोरी करनी चाहिए?)
नैतिक तर्कना (Moral Reasoning): सही या गलत का निर्णय लेने के लिए जो दिमागी चिंतन किया जाता है।
नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण
कोलबर्ग ने नैतिकता को 3 स्तरों में बांटा है, और प्रत्येक स्तर में 2 चरण हैं (कुल 6 चरण)।
स्तर 1: पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-Conventional Level)
(आयु: 4 से 10 वर्ष)
इस स्तर पर बच्चे की अपनी कोई नैतिकता नहीं होती, वह बाहरी नियमों से चलता है।
चरण 1: दंड एवं आज्ञापालन (Punishment and Obedience): बच्चा बड़ों की बात इसलिए मानता है ताकि उसे सजा न मिले। "चोरी करना बुरी बात है क्योंकि उससे जेल होगी।"
चरण 2: साधनात्मक सापेक्षतावादी / व्यक्तिवाद (Instrumental Relativist / Tit for Tat): "जैसे को तैसा"। बच्चा अपना फायदा देखता है। "अगर तुमने मेरा खिलौना तोड़ा, तो मैं तुम्हारा तोड़ दूंगा।" इसे आदान-प्रदान की अवस्था भी कहते हैं।
स्तर 2: परंपरागत स्तर (Conventional Level)
(आयु: 10 से 13 वर्ष)
इस स्तर पर बच्चा समाज के नियमों और परंपराओं को सही मानता है और उनका पालन करता है।
चरण 3: अच्छा लड़का - अच्छी लड़की (Good Boy - Nice Girl): दूसरों की नज़रों में अच्छा बनने के लिए व्यवहार करना। प्रशंसा पाना मुख्य उद्देश्य होता है।
चरण 4: कानून और व्यवस्था (Law and Order): नियमों का सख्ती से पालन करना। बच्चा मानता है कि नियम समाज के लिए हैं और उन्हें किसी भी हाल में तोड़ा नहीं जाना चाहिए।
स्तर 3: उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-Conventional Level)
(आयु: 13 वर्ष से ऊपर)
यहाँ नैतिकता खुद के सिद्धांतों पर आधारित होती है, न कि समाज के डर पर।
चरण 5: सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार (Social Contract): व्यक्ति मानता है कि नियम लोगों की भलाई के लिए हैं। अगर कोई नियम किसी की जान ले रहा है या नुकसान पहुँचा रहा है, तो उसे बदला जा सकता है।
चरण 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत (Universal Ethical Principles): यह नैतिकता का सर्वोच्च स्तर है। यहाँ व्यक्ति न्याय, समानता और मानवाधिकारों के लिए अपनी जान भी दे सकता है (जैसे- गांधी जी, नेल्सन मंडेला)। यह चरण बहुत कम लोगों में विकसित होता है।
कोलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना (Criticism)
कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan): इन्होंने कोलबर्ग की आलोचना की क्योंकि कोलबर्ग ने केवल पुरुष प्रतिभागियों पर प्रयोग किया था। गिलिगन के अनुसार, महिलाओं की नैतिकता 'देखभाल' (Care) पर आधारित होती है, जबकि पुरुषों की 'न्याय' (Justice) पर। कोलबर्ग ने महिलाओं के दृष्टिकोण को अनदेखा किया (Gender Bias)।
सांस्कृतिक पूर्वाग्रह: यह सिद्धांत सभी संस्कृतियों पर समान रूप से लागू नहीं होता।
तुलनात्मक सारांश (Quick Comparison)
| विशेषता | जीन पियाजे | लेव वाइगोत्सकी |
| विकास का आधार | जैविक परिपक्वता (Biology/Age) | सामाजिक-सांस्कृतिक (Society/Culture) |
| विकास की दिशा | विकास -> अधिगम (Development leads Learning) | अधिगम -> विकास (Learning leads Development) |
| भाषा और विचार | विचार पहले आता है, भाषा बाद में | भाषा और विचार स्वतंत्र होते हैं, फिर मिलते हैं |
| निज वाक् (Private Speech) | अहमकेंद्रित (उपयोगी नहीं माना) | स्व-नियमन (Self-regulation) के लिए महत्वपूर्ण |
| शिक्षक की भूमिका | सुविधादाता (Facilitator), लेकिन खोज मुख्य है | मार्गदर्शक और सहायक (Scaffolding provider) |
पियाजे, कोह्लबर्ग एवं वाइगोत्स्की के सिद्धान्त
Mock Test: 20 Questions | 20 Minutes
